sab ko KHud se bacha raha hooñ main | सब को ख़ुद से बचा रहा हूँ मैं

  - Om Bhutkar Maghloob
सबकोख़ुदसेबचारहाहूँमैं
अपनानक़्शामिटारहाहूँमैं
दिलकातेरेहवामेंजान-ए-जाँ
पुर्ज़ापुर्ज़ाउड़ारहाहूँमैं
यासजाताहूँतेरीडोलीया
अपनीमय्यतसजारहाहूँमैं
ताकिफिरशे'रकाधमाकाहो
रोज़बारूदखारहाहूँमैं
दिलकेमैंनेबढ़ाएदामबहुत
जानसस्तीबनारहाहूँमैं
ढोंगहैयेमिरीनईउल्फ़त
अबभीवा'दानिभारहाहूँमैं
बातमनहूसइकसुनानेको
पहलेअच्छीसुनारहाहूँमैं
ईददीवालीहोकिबैसाखी
जश्न-ए-उर्दूमनारहाहूँमैं
तंगआयाहटाकेकाँटोंको
अबतोरस्ताहटारहाहूँमैं
अबतोदेतेनहींग़ुलामीभी
दौरथाइकख़ुदारहाहूँमैं
आगलगनेकीचाहसेहीतो
शम्अ'घरमेंजलारहाहूँमैं
अबतिराज़हरफैलेबाहरभी
अबतो'मग़्लूब'जारहाहूँमैं
  - Om Bhutkar Maghloob
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