kabhi jhoote sahaare gham men raas aaya nahin karte | कभी झूटे सहारे ग़म में रास आया नहीं करते

  - Nushur Wahidi
कभीझूटेसहारेग़ममेंरासआयानहींकरते
येबादलउड़केआतेहैंमगरसायानहींकरते
यहीकाँटेतोकुछख़ुद्दारहैंसेहन-ए-गुलिस्ताँमें
किशबनमकेलिएदामनतोफैलायानहींकरते
वोलेलेंगोशा-ए-दामनमेंअपनेयाफ़लकचुनले
मिरीआँखोंमेंआँसूबारबारआयानहींकरते
सलीक़ाजिनकोहोताहैग़म-ए-दौराँमेंजीनेका
वोयूँँशीशेकोहरपत्थरसेटकरायानहींकरते
जोक़ीमतजानतेहैंगर्द-ए-राह-ए-ज़िंदगानीकी
वोठुकराईहुईदुनियाकोठुकरायानहींकरते
क़दममय-ख़ानामेंरखनाभीकार-ए-पुख़्ता-काराँहै
जोपैमानाउठातेहैंवोथर्रायानहींकरते
'नुशूर'अहल-ए-ज़मानाबातपूछोतोलरज़तेहैं
वोशा'इरहैंजोहक़कहनेसेकतरायानहींकरते
  - Nushur Wahidi
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