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Nityanand Vajpayee
chamakna hai to phir chugli lagana seekh lo upamanyu
chamakna hai to phir chugli lagana seekh lo upamanyu | चमकना है तो फिर चुगली लगाना सीख लो उपमन्यु
- Nityanand Vajpayee
चमकना
है
तो
फिर
चुगली
लगाना
सीख
लो
उपमन्यु
वगरना
सिर्फ़
मेहनत
से
कोई
तारा
न
चमकेगा
- Nityanand Vajpayee
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शिकार
करने
से
पहले
दो
गज
हटा
हूँ
पीछे
ये
जान
लो
तुम
तुम्हारी
तलवार
तीर
के
वश
ठहर
गया
हूँ
ये
मत
समझना
Nityanand Vajpayee
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इतना
मज़बूर
न
कर
मुँह
से
कुछ
बुरा
निकले
ज़ुल्म
इतना
भी
न
ढा
दिल
से
बद-दुआ
निकले
Nityanand Vajpayee
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मेरी
आस्तीन
में
जो
पलते
हैं
साँप
बनके
ही
क्यूँ
निकलते
हैं
मैं
ने
सबकुछ
लुटा
दिया
जिनको
मेरी
ख़ातिर
वो
विष
उगलते
हैं
इल्म
बेशक़
न
रंच
भर
जिनको
सब
सेे
ज़्यादा
वही
उछलते
हैं
ख़ुदस
ज़्यादा
यक़ीन
था
जिनपे
पाँव
मेरा
वही
कुचलते
हैं
छोड़ा
जिनको
था
केंचुआ
कहकर
अब
वो
अज़गर
बने
टहलते
हैं
मेरे
उपवन
में
ही
उगे
थे
वो
'नित्य'
काँटे
मुझे
जो
खलते
हैं
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Nityanand Vajpayee
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दिल
को
मेरे
भला
और
क्या
चाहिए
मैं
वफ़ा
कर
रहा
हूँ
वफ़ा
चाहिए
यह
मुक़दमा
हुआ
है
पुराना
बहुत
अब
तो
इसका
मुझे
फ़ैसला
चाहिए
मैं
नहीं
आऊँगा
आपकी
सिम्त
में
अब
नहीं
आप
सा
रहनुमा
चाहिए
ज़िन्दगी
बे-वफ़ा
छोड़
देगी
मुझे
मौत
तेरा
मुझे
आसरा
चाहिए
साँप
से
दुश्मनी
हो
गई
अब
मेरी
दोस्ती
के
लिए
नेवला
चाहिए
'नित्य'
रब
भी
मिलेगा
लगाओ
लगन
भक्त
प्रह्लाद
सी
साधना
चाहिए
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Nityanand Vajpayee
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हम
बहुत
देर
से
सीखे
हैं
ग़ज़ल-गोई
मियाँ
क़ाश
आती
ये
जवानी
में
तो
अच्छा
होता
ज़ख़्म
जो
उसने
दिए
हैं
मैं
उन्हें
सी
कर
फिर
डूबता
उसकी
रवानी
में
तो
अच्छा
होता
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Nityanand Vajpayee
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