main akela hi zamaane ke li.e kaafi hooñ | मैं अकेला ही ज़माने के लिए काफ़ी हूँ

  - Nityanand Vajpayee
मैंअकेलाहीज़मानेकेलिएकाफ़ीहूँ
दुखतीरगइसकीदबानेकेलिएकाफ़ीहूँ
तुमसमझतेहोकिनादानसा'आशिक़हूँमैं
इश्क़मेंख़ुदकोमिटानेकेलिएकाफ़ीहूँ
वैसेऔक़ातमेरीछोटीहैबेशकलेकिन
तेराहरनाज़उठानेकेलिएकाफ़ीहूँ
ज़ुल्मगरकोईशहंशाहभीतुझपरढाए
तख़्तउसकामैंगिरानेकेलिएकाफ़ीहूँ
चलयेमानाकितूदरियाहैग़मोंकातोफिर
मैंसमुंदरहूँसमानेकेलिएकाफ़ीहूँ
मुल्ककोजोभीमिटानेकीहैंसाज़िशमेंउन्हें
उनकीऔक़ातपेलानेकेलिएकाफ़ीहूँ
'नित्य'मैंशम्सनहींहूँकिज़मानेभरको
रौशनीतुझकोदिखानेकेलिएकाफ़ीहूँ
  - Nityanand Vajpayee
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