छुपते-छुपते वो मुझे देख के अँगड़ाती है

  - Nityanand Vajpayee
छुपते-छुपतेवोमुझेदेखकेअँगड़ातीहै
थोड़ाइठलातीहैशरमातीहैघबरातीहै
उसकोदेखूँतोबहकजानेकोकहताहैयेदिल
औरफिरउसपेभीआँखोंसेवोबतियातीहै
मेरीनज़रोंमेंनज़ारोंकीतरहबसतोगई
ग़ौरसेदेखूँज़रासाभीतोछुपजातीहै
वैसेकोयलसीचहकतीमैंउसेसुनताहूँ
सामनेआऊँतोकुछकहनेसेकतरातीहै
मुझकोलगतावोचकोरीहैकिबिछड़ीचकवी
शामहोतेहीजोछज्जेपेचलीआतीहै
मैंजोचलताहूँतोचलतीहैज़रासाआगे
मैंजोरुकजाऊँतोफिरहौलेसेरुकजातीहै
ख़्वाबउपमन्युतुम्हाराहैयेकुछऔरनहीं
ज़िंदगीतुमकोख़यालोंमेंयूँँउलझातीहै
  - Nityanand Vajpayee
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