gulaab haath men rakh sar pe titliyan rakh le | गुलाब हाथ में रख सर पे तितलियाँ रख ले

  - Nityanand Vajpayee
गुलाबहाथमेंरखसरपेतितलियाँरखले
सभीपेप्यारलुटारुख़मेंनर्मियाँरखले
परोपकारकिएजाबशरतूदुनियामें
किसीगरीबकेख़ातिरभीरोटियाँरखले
क़रीबख़ुदहीचलीआएगीतेरीमंज़िल
बसइतनाकरकिगुनाहोंसेदूरियाँरखले
वतनपेआँचजोआएतोजानतकदेलुटा
किदुश्मनोंकेलिएदिलमेंबिजलियाँरखले
मैं'नित्य'तुझकोसिखाताहूँयादरखयेसबक़
मसाफ़-ए-ज़ीस्त-ए-समंदरमेंकश्तियाँरखले
  - Nityanand Vajpayee
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