छोड़ो मोह ! यहाँ तो मन को बेकल बनना पड़ता है

  - Nishtar Khanqahi
छोड़ोमोह!यहाँतोमनकोबेकलबननापड़ताहै
मस्तोंकेमयख़ानेकोभीमक़तलबननापड़ताहै
सारेजगकीप्यासबुझाना,इतनाआसाँकामहैक्या?
पानीकोभीभापमेंढलकरबादलबननापड़ताहै
जलतेदिएकोलौहीजानेउसकीआँखेंजानेंक्या?
कैसी-कैसीझेलकेबिपता,काजलबननापड़ताहै
'मीर'कोईथा'मीराकोईलेकिनउनकीबातअलग
इश्क़करना,इश्क़मेंप्यारेपागलबननापड़ताहै
"निश्तर"साहब!हमसेेपूछो,हमनेज़र्बेझेलीहैं
घाइलमनकीपीड़समझनेघाइलबननापड़ताहै
  - Nishtar Khanqahi
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