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Nilesh Barai
tumne kaale ko kaha jabse bahut sundar rang
tumne kaale ko kaha jabse bahut sundar rang | तुमने काले को कहा जबसे बहुत सुन्दर रंग
- Nilesh Barai
तुमने
काले
को
कहा
जबसे
बहुत
सुन्दर
रंग
दौड़
के
गोरे
चले
और
हसीं-तर
बनने
- Nilesh Barai
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ग़ैर
से
खेली
है
होली
यार
ने
डाले
मुझ
पर
दीदा-ए-ख़ूँ-बार
रंग
Imam Bakhsh Nasikh
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दे
दिए
है
दाग
अब
तो
रंग
जमना
चाहिए
बस
तिरे
इस
हाथ
में
ख़ंजर
न
दिखना
चाहिए
Nikunj Rana
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महफ़िल
में
तेरी
यूँँ
ही
रहे
जश्न-ए-चरागाँ
आँखों
में
ही
ये
रात
गुज़र
जाए
तो
अच्छा
Sahir Ludhianvi
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क़र्ज़
की
पीते
थे
मय
लेकिन
समझते
थे
कि
हाँ
रंग
लावेगी
हमारी
फ़ाक़ा-मस्ती
एक
दिन
Mirza Ghalib
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लब
हैं
जैसे
गुल
सुमबुल
रंग-ए-याक़ूती
ख़ुद
को
मैख़ाना
तितली
का
बना
रखा
है
ALI ZUHRI
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ये
रंग-ओ-नस्ल
और
तशद्दुद
के
सिलसिले
दुश्मन
की
राहतों
के
सिवा
और
कुछ
नहीं
Fatima wasiya jaayasi
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रंग
सारे
फीके
फीके
ही
लगेंगे
मुझको
अब
उनकी
आँखों
का
जो
काला
सुर्मा
देखा
है
अभी
Harsh saxena
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ये
भी
इक
रंग
है
शायद
मिरी
महरूमी
का
कोई
हँस
दे
तो
मोहब्बत
का
गुमाँ
होता
है
Ghulam Mohammad Qasir
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वो
करेंगे
वस्ल
का
वा'दा
वफ़ा
रंग
गहरे
हैं
हमारी
शाम
के
Muztar Khairabadi
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कितने
ही
लगे
रंग
ज़माने
में
सभी
पर
सब
रंग
छुपा
लेती
है
आकर
यहाँ
होली
Aves Sayyad
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दिल
को
यूँँ
शाद
किए
जाते
हैं
शैर
आबाद
किए
जाते
हैं
दर्द
इक
भूल
नहीं
पाते
हम
और
ईजाद
किए
जाते
हैं
तुमको
ही
भूलने
की
कोशिश
में
बारहा
याद
किए
जाते
हैं
मन
में
तो
क़ैद
किए
रक्खा
है
दिल
से
आज़ाद
किए
जाते
हैं
जिसने
बर्बाद
किया
था
मुझको
उसको
आबाद
किए
जाते
हैं
मुल्क
में
हालत-ए-बेकारी
है
उस
पे
अस्नाद
किए
जाते
हैं
आतिश-ए-ग़म
से
न
जल
जाए
कहीं
रूह
फ़ौलाद
किए
जाते
है
या-ख़ुदा
लोग
तिरी
दुनिया
के
ख़ूब
फ़र्याद
किए
जाते
हैं
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Nilesh Barai
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ख़ुद
को
ऐसे
तबाह
कर
लेंगे
इश्क़
और
फिर
निक़ाह
कर
लेंगे
आज
मौका
मिला
है
तो,
लड़
ले
फिर
किसी
दिन
सलाह
कर
लेंगे
सिर्फ़
तेरी
ख़ुशी
की
ख़ातिर
हम
ख़ुद
पे
भी
इश्तिबाह
कर
लेंगे
छोड़
कर
तुम
हमें
नहीं
जाना
वर्ना
कमरें
सियाह
कर
लेंगे
ज़िक्र
यारी
में
इश्क़
का
जो
किया
कूचा-ए-दिल
रज़्म-गाह
कर
लेंगे
क़स्र-ए-आलीशाँ
छोड़
आए
तिरा
हम
कहीं
भी
पनाह
कर
लेंगे
क्या
ज़रूरत
है
चारा-गर
की
हमें
दर्द
जब
हो
तो
आह
कर
लेंगे
वस्ल
का
तो
मुझे
पता
ही
नहीं
हिज्र
हम
बे-पनाह
कर
लेंगे
शा'इरी
मौत
की
हुई
जिस
दिन
जा
के
हम
वाह-वाह
कर
लेंगे
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Nilesh Barai
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ग़मों
में
जी
रहे
है
रिंद
सारे
खता
मत
पूछ
याँ
सागर
गिरा
है
Nilesh Barai
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दो
दिन
चलता
है
बाबू
शोना
जानू
बाद
में
आना-कानी
होने
लगती
है
Nilesh Barai
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बुत
-
परस्ती
ये
जहाँ
वालों
की
देखी
जबसे
चाक
-
दिल
को
ले
के
हम
आ
गए
पत्थर
बनने
Nilesh Barai
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