har aan tumhaare chhupne se aisa hi agar dukh paayenge ham | हर आन तुम्हारे छुपने से ऐसा ही अगर दुख पाएँगे हम

  - Nazeer Akbarabadi
हरआनतुम्हारेछुपनेसेऐसाहीअगरदुखपाएँगेहम
तोहारकेइकदिनइसकीभीतदबीरकोईठहराएँगेहम
बेज़ारकरेंगेख़ातिरकोपहलेतोतुम्हारीचाहतसे
फिरदिलकोभीकुछमिन्नतसेकुछहैबतसेसमझाएँगेहम
गरकहनादिलनेमानलियाऔररुकबैठातोबहत्तरहै
औरचैनलेनेदेवेगातोभेसबदलकरआएँगेहम
अव्वलतोनहींपहचानोगेऔरलोगेभीपहचानतोफिर
हरतौरसेछुपकरदेखेंगेऔरदिलकोख़ुशकरजाएँगेहम
गरछुपनाभीखुलजावेगातोमिलकरअफ़्सूँ-साज़ोंसे
कुछऔरहीलटकासेहर-भराउसवक़्तबहमपहुँचाएँगेहम
जबवोभीपेशजावेगाऔरशोहरतहोवेगीफिरतो
जिससूरतसेबनआवेगातस्वीरखिंचामंगवाएँगेहम
मौक़ूफ़करोगेछुपनेकोतोबेहतरवर्ना'नज़ीर'आसा
जोहर्फ़ज़बाँपरलाएँगेफिरवोहीकरदिखलाएँगेहम
  - Nazeer Akbarabadi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy