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Naviii dar b dar
muhabbat ko yuñ aazmaane se pahle
muhabbat ko yuñ aazmaane se pahle | मुहब्बत को यूँँ आज़माने से पहले
- Naviii dar b dar
मुहब्बत
को
यूँँ
आज़माने
से
पहले
अदावत
भी
होगी
ज़माने
से
पहले
ये
दिल
भी
अभी
कितने
ही
टूटेंगे
यूँँ
ये
रिश्ता
है
नाज़ुक
निभाने
से
पहले
किसी
की
कहानी
रहेगी
सलामत
कोई
होगा
तन्हा
भुलाने
से
पहले
जहाँ
तक
नज़र
जाएगी
इस
जहाँ
में
सितमगर
भी
होंगे
ज़माने
से
पहले
कभी
कोशिशें
लाख
होंगी
मुयस्सर
है
नाज़ुक
ये
दिल
टूट
जाने
से
पहले
- Naviii dar b dar
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प्रेम
में
भटका
हुआ
हूँ
आज-कल
हर
तरफ़
लटका
हुआ
हूँ
आज-कल
कोई
जब
से
आया
है
जीवन
में
यूँँ
तब
से
ही
अटका
हुआ
हूँ
आज-कल
मुझको
मेरी
हैसियत
भी
है
पता
दर्द
में
खटका
हुआ
हूँ
आज-कल
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ये
ख़्वाबों
की
दुनिया
बसाए
हैं
हम
भी
मुहब्बत
ज़रा
आज़माए
हैं
हम
भी
सजाए
तो
कैसे
सजाए
कोई
ख़्वाब
यहाँ
मुफ़लिसी
के
सताए
हैं
हम
भी
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झूठे
वचन
कितने
निभाए
जाएँगे
आकर
वो
ख़्वाबों
में
सताए
जाएँगे
होगा
ज़मीं
से
जब
कभी
भी
सामना
दिन
में
भी
तारे
यूँँ
दिखाए
जाएँगे
मुफ़्लिस
यहाँ
भी
डूबकर
चुपचाप
है
यूँँ
राज़
दुनिया
से
छुपाए
जाएँगे
कर
के
वो
दावे
जब
तुम्हें
ललचाएँ
तो
मुफ़लिस
यहाँ
अक्सर
लुभाए
जाएँगे
2212
2212
2212
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भविष्य
मेरे
बदलने
को
रात
दिन
जब
वो
यूँँ
बोझ
उठाते
रहे
उम्र
भर
पिता
मेरे
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हम
तो
देते
ही
रहे
यूँँ
मुस्कुराहट
हम
ज़माने
की
अदावत
भी
न
समझे
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