muhabbat ke aise savaabon se lipate | मुहब्बत के ऐसे सवाबों से लिपटे

  - Naviii dar b dar
मुहब्बतकेऐसेसवाबोंसेलिपटे
रहेआँखेंखोलेभीख़्वाबोंसेलिपटे
कईमुद्दतोंबादआएनज़रवो
जोथेख़तकेपुर्ज़ेगुलाबोंसेलिपटे
किसीकोवोबातेंअभीयादहोंगी
थेअल्फ़ाज़अपनेकिताबोंसेलिपटे
रहेलबतोख़ामोशउनकेलिएही
जोरहतेथेअक्सरजवाबोंसेलिपटे
नवीयादआतेहैंहरएकपलवो
रहाकरतेथेहमख़िताबोंसेलिपटे
  - Naviii dar b dar
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