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Naviii dar b dar
Har shakhs men neeyat ko yahaan
हर शख़्स में नीयत को यहाँ ढूँढ़ रहा हूँ
- Naviii dar b dar
हर
शख़्स
में
नीयत
को
यहाँ
ढूँढ़
रहा
हूँ
मैं
बात
की
औसत
को
यहाँ
ढूँढ़
रहा
हूँ
है
आदमी
क्यूँ
आदमी
का
अब
यहाँ
दुश्मन
उस
खोई
'अक़ीदत
को
यहाँ
ढूँढ़
रहा
हूँ
है
नफ़रतों
का
घर
यहाँ
भी
हर
किसी
का
मन
मैं
दिल
से
मुहब्बत
को
यहाँ
ढूँढ़
रहा
हूँ
- Naviii dar b dar
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कुछ
तो
चोरों
की
तरह
थी
आदतें
यूँँ
तो
हमें
एक
दिल
भी
हम
किसी
का
यूँँ
चुरा
पाए
नहीं
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ये
कितनी
अलग
लगती
है
ना
मुहब्बत
में
अपनी
कहानी
न
इज़हार
करता
है
वो
तो
यूँँ
मुझ
सेे
निगाहें
मिलाकर
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हर
किसी
को
उत्तर
भी
देता
है
अपने
शब्दों
के
वो
ऐसा
छोटा
सा
एक
शायर
है
वो
अपने
शहर
का
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क्या
फिर
मुहब्बत
की
कहानी
याद
है
जो
थी
किसी
की
ज़िंदगानी
याद
है
सब
कुछ
लुटा
बैठे
किसी
के
प्यार
में
तुम
को
वो
इक
लड़की
सयानी
याद
है
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बंदिशों
की
बेड़ियों
में
जकड़े
हो
गर
तुम
भी
तो
हथियार
क़लम
को
बना
लो
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