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Naviii dar b dar
duniya badi kharaab zara dekh bhaal ke
duniya badi kharaab zara dekh bhaal ke | दुनिया बड़ी ख़राब ज़रा देख भाल के
- Naviii dar b dar
दुनिया
बड़ी
ख़राब
ज़रा
देख
भाल
के
मिलते
नहीं
जवाब
यहाँ
हर
सवाल
के
क़िस्मत
में
कोई
मिल
न
सका
हमको
तो
यहाँ
आए
हैं
ज़िन्दगी
में
कई
तो
कमाल
के
हस्ती
भी
अपनी
मिट
गई
तेरे
ही
प्यार
में
हमको
तो
फिर
से
बख़्श
दो
तुम
यूँँ
बहाल
के
- Naviii dar b dar
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है
यक़ीं
अब
न
वो
लौट
के
आएगा
हाथ
छोड़ा
था
जिस
रस्ते
चलते
हुए
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यूँँ
तो
हर
उलझनों
से
उलझा
पड़ा
हूँ
मैं
पर
फिर
भी
ज़िन्दगी
में
डटकर
खड़ा
हूँ
मैं
ग़म
कोई
भी
न
छू
पाए
मेरे
घर
को
यूँँ
ये
ज़िम्मेदारी
से
जो
घर
का
बड़ा
हूँ
मैं
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ज़मीं
पे
आसमाँ
पिघला
हुआ
ही
पाओगे
समय
यूँँ
हाथों
से
निकला
हुआ
ही
पाओगे
किसी
के
वास्ते
ख़ुद
को
सँवार
कर
देखो
तुम
अपने
आप
को
बदला
हुआ
ही
पाओगे
बने
रहेंगे
ज़माने
में
यूँँ
सितमगर
भी
ज़माने
भर
को
यूँँ
पगला
हुआ
ही
पाओगे
किसी
की
याद
में
दिन
रात
गर
यूँँ
तड़पे
हो
यूँँ
प्यासे
दिल
को
तो
मचला
हुआ
ही
पाओगे
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कितने
ख़यालों
को
भी
पाले
रखा
इश्क़
को
हमने
भी
सँभाले
रखा
मुझ
सेे
भले
आज
वो
बिछड़ा
हुआ
दिल
से
सभी
को
भी
निकाले
रखा
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भला
आँखों
के
भँवर
में
फॅंसे
निकलेंगे
कहाँ
हमें
तो
इश्क़
की
गहराई
का
अंदाज़ा
नहीं
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