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Naviii dar b dar
apni palkon men yuñ bitha baitheen
apni palkon men yuñ bitha baitheen | अपनी पलकों में यूँँ बिठा बैठें
- Naviii dar b dar
अपनी
पलकों
में
यूँँ
बिठा
बैठें
दिल
की
दुनिया
ही
अब
बना
बैठें
दिल
से
गर
हम
सेे
दोस्ती
रक्खो
सारी
दुनिया
को
हम
भुला
बैठें
फ़ासले
दिल
से
मिट
ही
जाएँगे
दूरियाँ
मन
से
गर
मिटा
बैठें
अब
तो
हर
ज़िक्र
में
हैं
वो
शामिल
होश
ख़ुद
के
न
यूँँ
गँवा
बैठें
मुझको
हद
में
संभाले
तुम
रक्खो
हारकर
दिल
को
जो
लगा
बैठें
- Naviii dar b dar
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कुछ
हसीन
ख़्वाब
तो
यूँँ
पलकों
पर
सजाए
भी
थे
इल्म
टूट
जाने
का
था
हम
तो
मुस्कुराए
भी
थे
वक़्त
भी
न
होता
ख़फ़ा
मेरे
हाल
पर
यूँँ
नवी
हम
तो
वरना
आसमाॅं
को
इस
ज़मीं
पे
लाए
भी
थे
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कुछ
काम
से
छले
गए
कुछ
नाम
से
छले
गए
जब
राह
भी
मिली
नहीं
आराम
से
छले
गए
किस
आस
में
रहें
भला
बदनाम
से
छले
गए
इक
राह
को
चले
कहाँ
अंजाम
से
छले
गए
जब
इश्क़
को
न
पा
सके
यूँँ
जाम
से
छले
गए
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मुहब्बत
ने
सबको
किनारा
दिया
है
किसी
शख़्स
का
यूँँ
सहारा
दिया
है
जिसे
मानता
है
ये
सारा
ज़माना
मुक़द्दस
ये
रिश्ता
भी
प्यारा
दिया
है
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ज़मीं
पे
आसमाँ
पिघला
हुआ
ही
पाओगे
समय
यूँँ
हाथों
से
निकला
हुआ
ही
पाओगे
किसी
के
वास्ते
ख़ुद
को
सँवार
कर
देखो
तुम
अपने
आप
को
बदला
हुआ
ही
पाओगे
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दिल
की
वो
जब
यूँँ
बग़ावत
भी
न
समझे
वो
तो
क्यूँ
झूठी
कहावत
भी
न
समझे
हम
तो
देते
ही
रहे
यूँँ
मुस्कुराहट
हम
ज़माने
की
अदावत
भी
न
समझे
2122
2122
2122
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