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Nakul kumar
saari shikast meri mire naseeb se hain
saari shikast meri mire naseeb se hain | सारी शिकस्त मेरी मेरे नसीब से हैं
- Nakul kumar
सारी
शिकस्त
मेरी
मेरे
नसीब
से
हैं
वरना
तो
हम
कई
बेहतर
उस
रक़ीब
से
हैं
तलवार
से
नहीं
और
ख़ंजर
से
भी
नहीं
है
इन
ज़ख़्मों
का
त'अल्लुक़
मेरे
हबीब
से
हैं
तस्वीर
तक
अब
उसकी
देखी
नहीं
है
जाती
जिस
सेे
मिरे
मरासिम
इतने
क़रीब
से
हैं
अब
कौन
मस'अले
सुलझाएगा
इस
तरह
के
सब
मस'अले
यहाँ
के
बेहद
मुहीब
से
हैं
- Nakul kumar
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एक
कमी
थी
ताज-महल
में
मैंने
तिरी
तस्वीर
लगा
दी
Kaif Bhopali
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पहले
दिल
से
नक़्श
मिटाये
जाते
हैं
मेज़
से
फिर
तस्वीर
हटा
दी
जाती
है
Rao Nasir
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वो
हमारा
ग़म
चुरा
कर
ले
गया
साथ
अपने
ले
गया
तस्वीर
भी
Meem Alif Shaz
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जिस
शख़्स
से
शदीद
मोहब्बत
हो
तुमको
वो
तस्वीर
में
दिखाया
गया
हो
किसी
के
साथ
Mueed Mirza
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उलझ
जाती
हूँ
अक्सर
आईने
से
मैं
तक़ाबुल
में
जो
ख़ुद
को
देखती
हूँ
अक्स
तेरा
ही
उभरता
है
Kiran K
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एक
तस्वीर
बनाऊँगा
तेरी
और
फिर
हाथ
लगाऊंगा
तुझे
Nasir khan 'Nasir'
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अजब
अंदाज़
के
शाम-ओ-सहर
हैं
कोई
तस्वीर
हो
जैसे
अधूरी
Asad Bhopali
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बस
तेरी
तस्वीर
ही
इक
पास
थी
उस
में
भी
तू
बेख़बर
सोई
हुई
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S M Afzal Imam
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जो
चुप-चाप
रहती
थी
दीवार
पर
वो
तस्वीर
बातें
बनाने
लगी
Adil Mansuri
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अपने
जैसी
कोई
तस्वीर
बनानी
थी
मुझे
मिरे
अंदर
से
सभी
रंग
तुम्हारे
निकले
Salim Saleem
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इक
शहज़ादी
ने
दी
है
इक
माँ
को
उतरन
इक
बच्ची
को
मिल
जाएँगे
नए
कपड़े
आज
Nakul kumar
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एक
चेहरा
मिरा
दर्द-ए-दिल
बन
गया
ठीक
था
आदमी
मुज़्महिल
बन
गया
इत्तिफ़ाक़न
मैं
गुज़रा
था
इक
कूचे
से
फिर
गुज़रना
ही
वो
मुस्तक़िल
बन
गया
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Nakul kumar
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बुझती
नहीं
ये
प्यास
है
ये
दिल
बहुत
उदास
है
कटती
रहेगी
ज़िंदगी
इक
याद
मेरे
पास
है
जाते
हुए
ही
फेंक
दे
मन
में
जो
भी
भड़ास
है
ग़म
दिल
के
सब
उतर
सके
इक
जाम
है
गिलास
है
आँखों
पे
पर्दे
हैं
यहाँ
सरकार
बे-लिबास
है
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Nakul kumar
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फिर
नया
ग़म
अगर
यार
देगा
इश्क़
उसका
मुझे
मार
देगा
मेरे
महबूब
का
है
हुनर
ये
ग़म
जो
देगा
मज़ेदार
देगा
राब्ता
तोड़
दूँ
तुम
से
सब
ये
मशवरा
हर
समझदार
देगा
घर
से
बेहतर
न
संसार
है
दोस्त
बस
निराशा
ही
संसार
देगा
आज
का
सच
नज़र
में
छुपा
लो
कल
ख़बर
झूठी
अख़बार
देगा
दुश्मनी
की
लगाना
ये
तस्वीर
नफ़रतो
की
वो
दीवार
देगा
तोड़
दूँ
मैं
अगर
अपना
पिंदार
तब
कहीं
यार
दीदार
देगा
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Nakul kumar
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जो
जहाँ
भर
से
दर
किनारा
हैं
क्यूँँ
ग़मों
को
वो
इतना
प्यारा
हैं
अश्क
आँखों
से
गिर
न
जाए
कहीं
पत्थरों
ने
हमें
पुकारा
हैं
ग़म
दिए
उसने
इस
मोहब्बत
से
दिल
कहे
मुझ
को
सब
गवारा
हैं
आज
टूटेगा
आसमाँ
से
जो
वो
शब-ए-हिज्र
का
सितारा
हैं
कशमकश
सब
हमीं
पे
भारी
हैं
और
फ़ैसला
भी
यहाँ
हमारा
हैं
हम
जुदा
ख़ुद
से
अब
तलक
हैं
और
उस
को
इक
ग़ैर
का
सहारा
हैं
दरमियाँ
कोई
भी
गिला
न
रहा
ये
जुदाई
का
इस्तिआरा
हैं
दिल
के
बाज़ार
का
हैं
हाल
बुरा
दिल
का
होता
यहाँ
ख़सारा
हैं
रौशनाई
से
लोग
अंधे
बने
तीरगी
का
'अजब
नज़ारा
हैं
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Nakul kumar
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