ruk gaya dariyaa samundar bah gaya | रुक गया दरिया समुन्दर बह गया

  - nakul kumar
रुकगयादरियासमुन्दरबहगया
औरफिरआख़िरहिमालयढहगया
एकमैंरिश्ताजिसेजीनेचला
ख़्वाबथाजोख़्वाबबनकररहगया
येज़रूरीथाकिमेरीमातहो
मैंइसेअपनामुक़द्दरकहगया
चाँदनीकासाथकेवलरातभर
मैंतेराजानाभीजानाँसहगया
दर्दकादरियारुकापलकोंतलक
एकदिनफिरअश्कबनकरबहगया
  - nakul kumar
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