ladkhadaati hai qalam rangeeniyaan hi kyuuñ liKHoon | लड़खड़ाती है क़लम रंगीनियाँ ही क्यूँ लिखूँ

  - nakul kumar
लड़खड़ातीहैक़लमरंगीनियाँहीक्यूँलिखूँ
लूसेजलताहैबदनपुर्वाइयाँहीक्यूँलिखूँ
दिखरहीहोंजबमुझेहैवानियतकीबस्तियाँ
तोइन्हेंमहबूबकीशैतानियाँहीक्यूँलिखूँ
देखलूँमैंजबकभीबूढ़ीभिखारनकोकहीं
क्यूँलिखूँग़ज़लोंमेंपरियाँरानियाँहीक्यूँलिखूँ
फूलसेबच्चोंकेचेहरेभूखसेबेरंगहों
तोबतादिलमिरेफिरतितलियाँहीक्यूँलिखूँ
माँतिरेचेहरेपेजबसेझुर्रियाँदिखनेलगीं
औरभीलिखनाहैकुछरानाइयाँहीक्यूँलिखूँ
क्यूँलिखूँज़ुल्फ़-ओ-लब-ओ-रुख़सारपेनग्मेंबहुत
प्यारकीपहलीनज़ररुस्वाइयाँहीक्यूँलिखूँ
लिखतोसकताहूँबहुतसीख़ुशनुमाऊँचाइयाँ
फिरग़मोंकीहीबहुतगहराइयाँहीक्यूँलिखूँ
क्यूँलिखूँदोनोंतरफ़दोनोंतरफ़कीक्यूँलिखूँ
रौशनीलिखदूँमगरपरछाइयाँहीक्यूँलिखूँ
जंगकेमैदानमेंयेख़ूनयासिन्दूरहै
शोरजबभरपूरहैशहनाइयाँहीक्यूँलिखूँ
पेटकीख़ातिरजोहरदमतोड़ताहोतनबदन
चैनसेबैठानहींअँगड़ाइयाँहीक्यूँलिखूँ
मैंलिखूँदुनियाकेहरइकआदमीकीज़िंदगी
मौतकीआमदयाफिरबीमारियाँहीक्यूँलिखूँ
येनएलड़केजोसोलहसालकेहीहैंअभी
इनकीयेमदमस्तियाँ-नादानियाँहीक्यूँलिखूँ
ज़िंदगीअपनीअभीतोज़िंदगीसेहैजुदा
अबमगरवीरानियाँ-बर्बादियाँहीक्यूँलिखूँ
हाँमिरेबेटेलिखूँगामैंतुझेमेलेबहुत
मैंअकेलाहीजियातन्हाइयाँहीक्यूँलिखूँ
  - nakul kumar
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