kaii qisse adhoore rah ga.e apni kahaanii men | कई क़िस्से अधूरे रह गए अपनी कहानी में

  - nakul kumar
कईक़िस्सेअधूरेरहगएअपनीकहानीमें
चलेआएहैंबचपनकोगँवाकेनौजवानीमें
हवाएँजोबग़ावतपरउतरआईहैंआख़िरमें
किसीतूफ़ानकीदस्तकहैमेरीज़िंदगानीमें
नईफ़स्लोंकोयेकुछऔरसेकुछऔरकरतेहैं
गुलाबोंकीजोख़ुशबूढूँढ़तेहैरातरानीमें
हमेंआकरबतातेहैंउजालोंकीसभीफ़ितरत
कभीरौशनहोपाएथेजोअपनीजवानीमें
तूहरइकबातपेजोरूठकेजानेकोकहताहै
तिराकिरदारहैबेहदअहममेरीकहानीमें
येमेरावक़्तहैइसवक़्तकीअपनीरवानीहै
जगासकताहूँअपनीप्यासभीमैंआग-पानीमें
  - nakul kumar
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