ek din us behaya ne shabd ansuljhe kahe | एक दिन उस बेहया ने शब्द अनसुलझे कहे

  - nakul kumar
एकदिनउसबेहयानेशब्दअनसुलझेकहे
माँनेजिसबेटेकीख़ातिरउम्रभरतानेसहे
दोघड़ीहैज़िन्दगीदो-चारपलखुलकेजियो
फिरकिसीकोक्यापताहैकौनकबकैसेरहे
लोगयेमँझधारमेंडूबेहैंफिरमारेगए
मानकरदुनियाकोसचबे-वक़्तजोबहतेरहे
हमभीतेरेसाथहैंकहकरगएदिखतेनहीं
अबतलकहूँसोचमेंअल्फ़ाज़येकिसनेकहे
लोगहैंवेहीसबबजोघरमेंहैवीरानगी
एकहीछतकेतलेकुछलोगजोघरमेंरहे
  - nakul kumar
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