ham apne ghar se b-rang-e-hawa nikalte hain | हम अपने घर से ब-रंग-ए-हवा निकलते हैं

  - Najeeb Ahmad
हमअपनेघरसेब-रंग-ए-हवानिकलतेहैं
किसीकेहक़मेंकिसीकेख़िलाफ़चलतेहैं
अभीतोदिनहैअभीतख़्त-ए-आसमाँपेचमक
तुलू-ए-शामकेसाथआफ़्ताबढलतेहैं
चलेभीहमतोमह-ओ-सालकीमिसालचले
फ़क़ीरलोगइन्हीसिलसिलोंमेंपलतेहैं
उड़ेभीहमतोउसीसम्तरुख़रहाअपना
जिधरउड़ेंतोफ़रिश्तोंकेपरभीजलतेहैं
हमारेअक्सतिरेशहरमेंरहेआबाद
किउसजगहतोफ़क़तआइनेबदलतेहैं
ज़मींपेपाँवज़राएहतियातसेधरना
उखड़गएतोक़दमफिरकहाँसँभलतेहैं
'नजीब'जिनकोग़रज़होकुछज़मानेसे
उन्हींकेसाथअबदतकज़मानेचलतेहैं
  - Najeeb Ahmad
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