zulm chakkha ya be-hisi chakkhi | ज़ुल्म चक्खा या बे-हिसी चक्खी

  - Nahid Akhtar Balooch
ज़ुल्मचक्खायाबे-हिसीचक्खी
क्याकभीतुमनेबेबसीचक्खी
मौतमिलतीरहीपियालाभर
एकहीघूँटज़िंदगीचक्खी
चाँदजबशाख़पेउतरआया
तबदरख़्तोंनेचाँदनीचक्खी
रखकेउँगलीज़बानपरउसकी
आजथोड़ीसीरौशनीचक्खी
शहदकाज़ाइक़ातोचक्खाहै
क्याकभीआँखशरबतीचक्खी
उसकालहजासमाअ'तोंमेंघुला
जैसेकानोंनेशाइ'रीचक्खी
सामनेरखकेचायकीप्याली
चुस्कीचुस्कीतिरीकमीचक्खी
आजआँखोंनेउसकोदेखाथा
आजपलकोंनेफिरनमीचक्खी
चूमकरइकगुलाबकाचेहरा
तितलियोंनेभीदिलकशीचक्खी
  - Nahid Akhtar Balooch
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