saba-o-gul ko mah-o-nazm ko deewana kiya | सबा-ओ-गुल को मह-ओ-नज्म को दिवाना किया

  - Naeem Akhtar
सबा-ओ-गुलकोमह-ओ-नज्मकोदिवानाकिया
मिरीसरिश्तनेहररंगकोनिशानाकिया
वहीबहारजिसेतुमबहारकहतेहो
सुलूकहमसेबहुतउसनेबाग़ियानाकिया
जहाँभीतेज़हवाओंनेसाथछोड़दिया
ग़ुबार-ए-राहनेअपनावहींठिकानाकिया
हमआख़िरउसकेख़द-ओ-ख़ालदेखतेकैसे
हमेशाउसनेक़रीबआनेसेबहानाकिया
सुख़नवरीकीइजाज़ततोदिलनेदेदीथी
मगरज़बाननेइज़हार-ए-मुद्दआकिया
सहरकीआँखसेआँसूटपकजाएँ'नईम'
येसोचकरबयाँरातकाफ़सानाकिया
  - Naeem Akhtar
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