dhundhlaa gaya hooñ door ke manzar men ja ke main | धुँधला गया हूँ दूर के मंज़र में जा के मैं

  - Nadir Ariz
धुँधलागयाहूँदूरकेमंज़रमेंजाकेमैं
पछतारहाहूँशह्‌रसेक़स्बेमेंकेमैं
अबउसकलीपेसिर्फ़मिराहक़हैदोस्तो
लौटाहूँहाथपेड़कोपहलेलगाकेमैं
शोलादिएकोज़िन्दगीदेतेहीबुझगया
मंज़रसेहटगयाउसेमंज़रपेलाकेमैं
साहबयक़ीनकीजिएचोरीकीख़ूनहीं
बाग़गयाहूँदोस्तकीबातोंमेंकेमैं
उसदरकेबंदहोनेकाबदलालियाहैदोस्त
जोबेचतारहाहूँदरीचेबनाकेमैं
  - Nadir Ariz
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