हम क्यूँँ ये कहें कोई हमारा नहीं होता

  - Muzaffar Warsi
हमक्यूँँयेकहेंकोईहमारानहींहोता
मौजोंकेलिएकोईकिनारानहींहोता
दिलटूटभीजाएतोमोहब्बतनहींमिटती
इसराहमेंलुटकरभीख़सारानहींहोता
सरमाया-ए-शबहोतेहैंयूँँतोसभीतारे
हरतारामगरसुब्हकातारानहींहोता
अश्कोंसेकहींमिटताहैएहसास-ए-तलव्वुन
पानीमेंजोघुलजाएवोपारानहींहोता
सोनेकीतराज़ूमेंमिरादर्दतौलो
इमदादसेग़ैरतकागुज़ारानहींहोता
तुमभीतो'मुज़फ़्फ़र'कीकिसीबातपेबोलो
शाएरकाहीलफ़्ज़ोंपेइजारानहींहोता
  - Muzaffar Warsi
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