online ki duniya | "ऑनलाइन की दुनिया"

  - Muskan Singh
"ऑनलाइनकीदुनिया"
अजनबीतोहमभीथेलेकिनजमानेकेलिए
उसेसिर्फ़अपनासमझा,अपनाबनानेकेलिए!
बातबातमेंरूठकरख़फ़ाहोजाताथामुझसेे
मैंनेबहुतकोशिशकीरूठेयारकोमनानेकेलिए
औरयहाँसमझताकोईनहींसच्चीमोहब्बतको
दिलखोलकररखदिया,उसेहाल-ए-दिलसुनानेकेलिए!
फिरभीनहींसमझपायावोमेरेदिलमेंज़ज़्बातको,
मैंनेभीअबउसेछोड़दिया,ज़मानेकीठोकरखानेकेलिए!
मोहब्बतमेंथोड़ासाझुकना,थोड़ाटूटनाज़रूरीहै,
लेकिनहरबारनहींगिरसकती,सिर्फ़एककोउठानेकेलिए!
बहुतमिलेंगेराहमेंमुसाफ़िर,सफ़रअभीतोशुरूहुआ
बहुतआएँगेबहुतजाएँगेमुझेभीआज़मानेकेलिए!
कभीभीगिरकरप्यारमतकरनाकिसीसेदोस्तो
यहाँलोगभरोसाभीतोड़तेहै,सिर्फ़हवसमिटानेकेलिए!
अगरमोहब्बतसच्चीहोतो,दूरतकपाकीज़गीनज़रआएगी
वरनाफ़रेबइश्क़करतेहैलोगसिर्फ़वक़्तनिकालनेकेलिए!
गरफसजाओकभीऐसेजंजालमेंतोफिर
क़दमपीछेकरलेनाआपकीज़िंदगीबचानेकेलिए!
बहुतमिलतेहैमेहब्बतकरनेवालेलोगयहाँऑनलाइनकीदुनियामें
कभीइनकीबातोंमेंमतआना,बादमेंपछतानेकेलिए!
  - Muskan Singh
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