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Murari Mandal
lagata ab vahii ilzaam ham par
lagata ab vahii ilzaam ham par | लगाता अब वही इल्ज़ाम हम पर
- Murari Mandal
लगाता
अब
वही
इल्ज़ाम
हम
पर
लुटाता
था
कभी
जो
शाम
हम
पर
- Murari Mandal
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शाम
को
जिस
वक़्त
ख़ाली
हाथ
घर
जाता
हूँ
मैं
मुस्कुरा
देते
हैं
बच्चे
और
मर
जाता
हूँ
मैं
Rajesh Reddy
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आख़िरी
बार
मैं
कब
उस
से
मिला
याद
नहीं
बस
यही
याद
है
इक
शाम
बहुत
भारी
थी
Hammad Niyazi
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सुब्ह
होती
है
शाम
होती
है
उम्र
यूँँही
तमाम
होती
है
Munshi Amirullah Tasleem
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कोई
इशारा
दिलासा
न
कोई
वा'दा
मगर
जब
आई
शाम
तिरा
इंतिज़ार
करने
लगे
Waseem Barelvi
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अभी
तो
शाम
की
दस्तक
हुई
है
अभी
से
लग
गया
बिस्तर
हमारा
यही
तन्हाई
है
जन्नत
हमारी
इसी
जन्नत
में
है
अब
घर
हमारा
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Vikas Sharma Raaz
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ज़ख़्म
है
दर्द
है
दवा
भी
है
जैसे
जंगल
है
रास्ता
भी
है
यूँँ
तो
वादे
हज़ार
करता
है
और
वो
शख़्स
भूलता
भी
है
हम
को
हर
सू
नज़र
भी
रखनी
है
और
तेरे
पास
बैठना
भी
है
यूँँ
भी
आता
नहीं
मुझे
रोना
और
मातम
की
इब्तिदा
भी
है
चूमने
हैं
पसंद
के
बादल
शाम
होते
ही
लौटना
भी
है
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Karan Sahar
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बुलाया
शाम
को
लेकिन
वहाँ
मैं
सुब्ह
जा
बैठा
सुना
था
देर
से
आना
उसे
अच्छा
नहीं
लगता
Krishnakant Kabk
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'मीर'
से
बैअत
की
है
तो
'इंशा'
मीर
की
बैअत
भी
है
ज़रूर
शाम
को
रो
रो
सुब्ह
करो
अब
सुब्ह
को
रो
रो
शाम
करो
Ibn E Insha
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बाक़ी
सारे
काम
भुलाकर
इश्क़
किया
सुब्ह
से
लेकर
शाम
बराबर
इश्क़
किया
ग़लती
ये
थोड़े
थी
इश्क़
किया
हम
ने
ग़लती
ये
थी
ग़ैर
बिरादर
इश्क़
किया
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Vashu Pandey
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हम
सेे
भी
इक
लड़की
मिलने
आती
थी
हम
भी
शाम
को
कैफ़े
जाया
करते
थे
Tanoj Dadhich
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जिसने
छीना
मिरा
ठिकाना
है
उसके
दिल
में
ही
घर
बनाना
है
Murari Mandal
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हुआ
किरदार
फेमस
तब
हमारा
कहानी
में
हमीं
मरने
लगे
जब
Murari Mandal
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तुम्हारे
भी
अधर
महसूस
कर
पाए
वो
ठंडक
कभी
जो
कल्पना
कर
के
उसे
चूमा
करूँँगा
Murari Mandal
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मेरे
रोने
पे
रोया
करता
था
कोई
तो
था
जो
मेरा
अपना
था
पूछता
हूँ
ये
आईने
से
अब
क्या
मैं
पहले
भी
इतना
तन्हा
था
लोग
इक
दिन
ये
कह
रहे
होंगे
कल
ही
देखा
था
कल
तो
अच्छा
था
सारी
दुनिया
की
बात
सुनता
कौन
वो
जो
कहती
थी
मान
लेता
था
अपनी
बद-क़िस्मती
कहूँ
किसको
पास
दरिया
थी
फिर
भी
प्यासा
था
साथ
हैं
मस्ख़रे
बहुत
लेकिन
वो
नहीं
है
जो
रोया
करता
था
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Murari Mandal
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हमारे
बीच
आया
तीसरा
क्यूँ
मैं
इसको
सोचकर
शब
भर
जगा
क्यूँ
बता
मेरे
ख़ुदा
ये
इश्क़
मुझको
नहीं
मिलना
ही
था
तो
फिर
हुआ
क्यूँ
मु'आफ़ी
माँग
लेता
हूँ
मैं
पहले
न
कहना
बाद
में
के
सच
कहा
क्यूँ
उसे
रोते
हुए
देखा
तो
जाना
हँसाता
है
हमेशा
मसखरा
क्यूँ
जो
सच
में
मार
देना
ही
था
मकसद
गई
फिर
छोड़
के
यूँं
अधमरा
क्यूँ
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