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Murari Mandal
gham ye andar se kha raha hai mujhe
gham ye andar se kha raha hai mujhe | ग़म ये अंदर से खा रहा है मुझे
- Murari Mandal
ग़म
ये
अंदर
से
खा
रहा
है
मुझे
छोड़कर
तू
भी
जा
चुका
है
मुझे
अब
मेरी
मौत
पर
ही
उतरेगा
तेरा
ऐसा
नशा
चढ़ा
है
मुझे
फ़िक्र
मेरी
तुझे
है
कितनी
जान
बोल
मत
साफ़
दिख
रहा
है
मुझे
जब
मेरे
साथ
ही
नहीं
रहना
क्यूँ
दरीचे
से
देखता
है
मुझे
सोचता
हूँ
कभी
मिलूँ
ख़ुद
से
और
पूछूँ
कि
क्या
हुआ
है
मुझे
मैंने
उस
वक़्त
खो
दिया
उसको
जब
लगा
था
वो
मिल
गया
है
मुझे
- Murari Mandal
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निशानी
साथ
में
रहती
है
उसकी
तो
ये
लगता
है
के
मेरा
यार
मेरे
साथ
में
हर
वक़्त
रहता
है
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मुझको
लगती
शराब
जैसी
है
वो
जो
लड़की
गुलाब
जैसी
है
उसको
कोई
भी
छू
नहीं
सकता
वो
हक़ीक़त
में
ख़्वाब
जैसी
है
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परछाइयों
से
मेरी
तो
अब
हो
रही
अन
बन
सूना
है
उसके
जाने
से
घर
और
ये
आँगन
मैंने
चखा
था
जिस्म
जो
वो
अब
किसी
का
है
जूठा
उठा
के
खा
रहे
मेरे
सभी
दुश्मन
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मुसलसल
इश्क़
में
पड़ते
रहेंगे
तुम्हारे
वास्ते
लड़ते
रहेंगे
अगर
पाबंदी
बढ़ती
ही
रही
तो
दिवाने
ज़िद
पे
यूँँ
अड़ते
रहेंगे
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जिसने
छीना
मिरा
ठिकाना
है
उसके
दिल
में
ही
घर
बनाना
है
जितना
रोना
था
रात
भर
रोया
दिन
में
हँसना
है
मुस्कुराना
है
लाख़
गिर
जाए
बिजलियाँ
ख़ुद
पर
फिर
भी
ख़ुश
हूँ
यही
बताना
है
उसके
बच्चे
भी
होने
वाले
हैं
मुझको
भी
घर
मिरा
बसाना
है
थी
मुहब्बत
वो
चार
दिन
की
ही
अब
जमाने
को
भूल
जाना
है
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