baahar hisaar-e-zabt se aanaa pada mujhe | बाहर हिसार-ए-ज़ब्त से आना पड़ा मुझे

  - Manmauji
बाहरहिसार-ए-ज़ब्तसेआनापड़ामुझे
आख़िरमलाल-ए-रूहबतानापड़ामुझे
मस्कनअराइशीमेंथीख़ुशियाँहीलाज़मी
सोग़मकोशा'इरीमेंसजानापड़ामुझे
करबैठाकलबक़ायाफ़राइज़कामैंहिसाब
साँसोंकाफिरहिसाबलगानापड़ामुझे
इकशे’रहुस्न-ए-यारकीरा’नाइयोंपेथा
अफ़सोस,महफ़िलोंमेंसुनानापड़ामुझे
तन्हाहीइसजहानमेंआयाथामैंकभी
तन्हाहीइसजहानसेजानापड़ामुझे
दिलसेज़राग़रीबथादिलकामकींमेरा
मेयारइसलिएभीगिरानापड़ामुझे
‘मौजी’मुहब्बतोंकीरिवायतअजीबथी
ख़ुदरूठकेभीउनकोमनानापड़ामुझे
  - Manmauji
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