raat jitni bhi chahe than | रात जितनी भी चाहे ठंडी है

  - Mohsin Ali
रातजितनीभीचाहेठंडीहै
राततन्हाईमैंहीकटनीहै
दिलअकेलेमेंजलनेलगताहै
बत्तीजबरातकोयेबुझतीहै
उसनेजोरोन्धदीहैपैरोंसे
क्याबताऊँकेमेरीपगड़ीहै
जबगिलेसबभुलादिएतुमने
क्यूँँतुम्हारीज़ुबाँपेतल्ख़ीहै
इकदफ़ाबसहुईख़तामुझसे
आजतकतंज़मुझपेकसतीहै
मैंहँसूतोतुम्हेंखटकताहूँ
ज़िन्दगीरोज़मुझपेहँसतीहै
तूअज़ाब-ए-ख़ुदासडरजाअब
गरतेरीमाँहीतुझसेडरतीहै
बातकोवोबिगाड़करबोली
मुझकोकुछबाततुमसेकरनीहै
दिललगानेकीअबनहींचाहत
मुझकोजोचाहेउसकीमर्ज़ीहै
  - Mohsin Ali
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