चाहत में क्या दुनिया-दारी इश्क़ में कैसी मजबूरी

  - Mohsin Bhopali
चाहतमेंक्यादुनिया-दारीइश्क़मेंकैसीमजबूरी
लोगोंकाक्यासमझानेदोउनकीअपनीमजबूरी
मैंनेदिलकीबातरखीऔरतूनेदुनियावालोंकी
मेरीअर्ज़भीमजबूरीथीउनकाहुक्मभीमजबूरी
रोकसकोतोपहलीबारिशकीबूंदोंकोतुमरोको
कच्चीमिट्टीतोमहकेगीहैमिट्टीकीमजबूरी
ज़ात-कदेमेंपहरोंबातेंऔरमिलींतोमोहरब-लब
जब्र-ए-वक़्तनेबख़्शीहमकोअबकेकैसीमजबूरी
जबतकहँसतागातामौसमअपनाहैसबअपनेहैं
वक़्तपड़ेतोयादजातीहैमसनूईमजबूरी
इकआवाराबादलसेक्यूँँमैंनेसायामाँगाथा
मेरीभीयेनादानीथीउसकीभीथीमजबूरी
मुद्दतगुज़रीइकवा'देपरआजभीक़ाएमहैं'मोहसिन'
हमनेसारीउम्रनिबाहीअपनीपहलीमजबूरी
  - Mohsin Bhopali
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy