ज़ख़्म से गहरी अगर तासीर हो

  - Ankur Mishra
ज़ख़्मसेगहरीअगरतासीरहो
क्याकरेंजबबे-वफ़ाहीहीरहो
उसबदनसेराब्ताकरलूँअगर
पीरउसकीहमनशींबे-पीरहो
रक़्सकरतीयेजवानीदेखकर
किसतरहख़्वाहिशकोईता'बीरहो
सोचताहूँइनलकीरोंमेंभीइक
यार'अंकुर'वोख़त-ए-तक़्दीरहो
  - Ankur Mishra
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