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Ankur Mishra
sau bahaane the jab KHud-kushi ke
sau bahaane the jab KHud-kushi ke | सौ बहाने थे जब ख़ुद-कुशी के
- Ankur Mishra
सौ
बहाने
थे
जब
ख़ुद-कुशी
के
ख़्वाब
देखे
थे
तब
ज़िंदगी
के
इस
तरह
छोड़
कर
ख़ुद
को
कैसे
यार
होते
कभी
हम
किसी
के
ख़्वाब
आँखों
में
तन्हा
हैं
जानाँ
पी
गया
अश्क
कोई
सभी
के
कब
तलक
इस
तरह
हम
किसी
को
ज़ख़्म
'अंकुर'
दिखाएँ
किसी
के
- Ankur Mishra
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टूटे
हुए
टुकड़े
तराशते
हैं
ख़ुद
में
वजूद
अपना
तलाशते
हैं
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हद
से
हम
अब
गुजर
थोड़ी
जाते
मियाँ
जो
कहा
हम
वो
कर
थोड़ी
जाते
मियाँ
है
मोहब्बत
बहुत
माना
तुझ
सेे
मगर
तेरे
बिन
हम
भी
मर
थोड़ी
जाते
मियाँ
ये
जो
रखते
हो
ख़ंजर
निगाहों
में
तुम
इनसे
हम
कोई
डर
थोड़ी
जाते
मियाँ
पहले
रिश्ते
रक़ीबों
से
तो
तोड़ते
लौट
फिर
हम
भी
घर
थोड़ी
जाते
मियाँ
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Ankur Mishra
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जलता
सुलगता
छोड़ा
था
कुछ
ऐसे
दिल
को
तोड़ा
था
कहने
को
अपना
था
वो
पर
उसने
ही
छाला
फोड़ा
था
मैं
आज
भी
हूँ
वैसा
ही
मुँह
उसने
मुझ
से
मोड़ा
था
कैसे
हो
अब
उस
पे
यक़ीं
दिल
ग़म
से
जिसने
जोड़ा
था
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Ankur Mishra
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जिस्म
जलने
लगा
है
तिरी
तिश्नगी
से
सनम
प्यास
बुझती
नहीं
क्यूँ
मिरी
मय-कशी
से
सनम
एक
अर्सा
हुआ
क्यूँ
तिरी
याद
आई
नहीं
एक
अर्सा
हुआ
बिछड़े
मुझ
को
ख़ुशी
से
सनम
देख
कर
आइना
सोचता
हूँ
मैं
अक्सर
यही
टूट
जाए
न
रिश्ता
कहीं
बे-ख़ुदी
से
सनम
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Ankur Mishra
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राज़-ए-वफ़ा
मैं
खोल
दूँ
तोहफ़ा
कोई
अनमोल
दूँ
मुश्किल
से
तो
माना
है
वो
सच
चाहते
हो
बोल
दूँ
बरसों
रहा
हूँ
प्यासा
मैं
अब
ज़हर
कैसे
घोल
दूँ
मर
जाउॅंगा
बिन
उसके
मैं
सोचा
है
उस
सेे
बोल
दूँ
शायद
सुकूँ
मिल
जाए
फिर
दिल
अपना
जब
ये
मोल
दूँ
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Ankur Mishra
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