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Ankur Mishra
rang le aayi mehn
rang le aayi mehn | रंग ले आई मेहंदी मगर
- Ankur Mishra
रंग
ले
आई
मेहंदी
मगर
हो
गया
तन्हा
सूना
शजर
मिट
गए
दाग़
दामन
से
सब
पाक़
होती
नहीं
क्यूँ
नज़र
कर
लिया
ख़ुद
को
सहरा
मगर
अश्क
रुकते
नहीं
सर-ब-सर
ढूॅंढ
लाया
हूँ
ख़ुद
को
मैं
पर
खो
दिया
मैंने
वो
रह-गुज़र
उम्र
भर
याद
करना
है
अब
वो
गली
वो
नज़र
वो
सहर
- Ankur Mishra
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छोड़
जाती
है
तन्हा
अकेला
मुझे
इस
तरह
मौत
वाक़िफ़
नहीं
जैसे
इस
ज़िंदगी
से
सनम
Ankur Mishra
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रात
तो
ये
गुज़र
जाने
देते
ये
नशा
तो
उतर
जाने
देते
हम
ने
कब
रक्खी
थी
शर्त
कोई
आँख
चाहे
ये
भर
जाने
देते
ख़ामख़ा
बे-वफ़ा
मैं
हुआ
यूँँ
अच्छा
था
मुझको
मर
जाने
देते
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Ankur Mishra
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मेरे
हिस्से
भी
तो
कोई
ख़्वाब
आए
साथ
मेरे
भी
कोई
अहबाब
आए
थक
गया
हूँ
ऐसे
चलते
चलते
मैं
अब
बस्ती
अब
तो
कोई
इक
आबाद
आए
मुद्दतों
फिरता
रहा
हूँ
प्यासा
दर
दर
होंठों
पे
अब
तो
नया
इक
आब
आए
मैं
ही
क्यूँ
हर
बार
खाऊँ
ज़ख़्म
यारों
नाम
अब
के
मेरा
उसके
बाद
आए
छोड़
देंगे
रास्ता
हम
उसका
अंकुर
पहले
मंज़िल
तो
कोई
नायाब
आए
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Ankur Mishra
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तुम
भी
हम
सेे
सवाल
करते
हो
यार
तुम
भी
कमाल
करते
हो
छीन
कर
ख़्वाब
मेरी
आँखों
से
आँखें
क्यूँ
अपनी
लाल
करते
हो
कट
गई
हिज्र
में
हमारी
भी
किसलिए
अब
मलाल
करते
हो
चूम
लेता
हूँ
हर
वो
शय
मैं
अब
जिस
तरफ़
अपना
गाल
करते
हो
आज
भी
है
ख़याल
उसका
ही
जिसका
अंकुर
ख़याल
करते
हो
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Ankur Mishra
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आग
वो
जो
बुझाई
न
जाए
याद
वो
जो
भुलाई
न
जाए
क्यूँ
कहें
बे-वफ़ा
हम
उसे
फिर
हम
सेे
ही
जब
निभाई
न
जाए
सोचा
था
छोड़
दें
रस्ता
वो
पर
बात
हम
सेे
बनाई
न
जाए
जबसे
देखा
है
वो
चाँद
हमने
शम्अ
तब
से
जलाई
न
जाए
मत
करो
हम
सेे
अब
ज़िक्र
उसका
अब
ये
उल्फ़त
छुपाई
न
जाए
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Ankur Mishra
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