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Ankur Mishra
KHud se hi jaise anjaan the
KHud se hi jaise anjaan the | ख़ुद से ही जैसे अंजान थे
- Ankur Mishra
ख़ुद
से
ही
जैसे
अंजान
थे
घर
में
अपने
ही
मेहमान
थे
पूछते
हो
पता
जिसका
तुम
हम
कभी
उसकी
पहचान
थे
देख
कर
मुझको
यूँँ
हारते
जीतने
वाले
हैरान
थे
मिल
न
पाए
दुबारा
कभी
रास्ते
वो
जो
आसान
थे
ख़ुद-कुशी
सोचा
कर
लूँ
मगर
सैकड़ों
दिल
में
अरमान
थे
छोड़
आया
उसे
तन्हा
ही
जिसकी
ख़ातिर
परेशान
थे
- Ankur Mishra
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किसलिए
और
क्या
पूछते
हो
इश्क़
कर
के
ख़ता
पूछते
हो
मुद्दतों
याद
आई
नहीं
जो
उस
सदा
की
सज़ा
पूछते
हो
हिज्र
में
बुझ
गए
जो
तुम्हारे
उन
दियों
से
हवा
पूछते
हो
सर्द
आलम
में
जलते
बदन
का
बेसबब
ही
मज़ा
पूछते
हो
है
अदा
ख़ूब
ये
भी
तुम्हारी
दर्द
से
ही
दवा
पूछते
हो
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छत
की
वो
इक
दीवार
है
साँसों
का
पहरेदार
है
कुछ
भी
नहीं
बिन
उसके
मैं
चैन-ओ-सुकूँ
वो
यार
है
जाऊँ
कहाँ
होकर
जुदा
मेरा
वो
ही
घर
बार
है
मत
पूछो
मुझ
सेे
नाम
वो
वो
पहला
मेरा
प्यार
है
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बन
तमाशाई
तमाशा
देखना
आप
तो
साहिब
निशाना
देखना
चोट
सीधा
दिल
पे
होगी
वा'दा
है
आप
उसका
मुस्कुराना
देखना
रात
तन्हा
प्यासी
कितनी
है
यहाँ
तुम
कभी
कोई
जनाज़ा
देखना
हाथ
ख़ाली
है
मगर
सब
मेरा
है
इश्क़
करना
और
शाना
देखना
ज़ख़्म
भर
जाने
के
'अंकुर'
बाद
तुम
ख़ूँ
से
आँखों
का
नहाना
देखना
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Ankur Mishra
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तेरे
बिना
भी
ठीक
हूँ
ख़ुद
के
बहुत
नज़दीक
हूँ
लगता
नहीं
अब
डर
मुझे
गुज़री
मैं
इक
तारीक
हूँ
है
हक़
तू
कर
ले
चाहे
जो
मैं
कौन
सा
तमलीक
हूँ
दो
पल
ठहर
जा
पास
बस
तेरी
ही
मैं
तहरीक
हूँ
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Ankur Mishra
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इश्क़
में
अब
ख़सारे
बहुत
हैं
लोग
उल्फ़त
में
हारे
बहुत
हैं
रहने
दो
छोड़ो
क़िस्सा
वो
अब
तुम
दरिया
के
इस
किनारे
बहुत
हैं
कैसे
आऊँ
मैं
फिर
उस
गली
अब
ज़ख़्म
हमको
ये
प्यारे
बहुत
हैं
बरसों
देखा
नहीं
ख़्वाब
कोई
आँखों
में
सपने
ख़ारे
बहुत
हैं
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Ankur Mishra
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