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Ankur Mishra
door sehra se shajar rakhna
door sehra se shajar rakhna | दूर सहरा से शजर रखना
- Ankur Mishra
दूर
सहरा
से
शजर
रखना
कश्तियों
को
बा-ख़बर
रखना
इन
परिंदों
से
हूँ
मैं
वाक़िफ़
इन
परिंदों
पे
नज़र
रखना
ज़िंदगी
की
रह-गुज़र
में
बस
आसमाँ
को
हम-सफ़र
रखना
- Ankur Mishra
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खेल
कर
ये
जुआ
देखना
पहलू
वो
अन-छुआ
देखना
माना
मुश्किल
है
जीना
मगर
माँगकर
तुम
दु'आ
देखना
होश
आ
जाए
शायद
तुम्हें
घर
वो
जलता
हुआ
देखना
बाद
सोने
के
मेरे
बशर
जिस्म
मेरा
मुआ
देखना
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Ankur Mishra
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कितनी
उल्फ़त
थी
कितनी
वफ़ा
है
अब
भी
तेरा
वही
रास्ता
है
ढूँढता
है
किसे
दर-ब-दर
तू
कैसा
ये
दर्द
कैसी
दवा
है
उम्र
भर
मैं
रहा
साथ
जिसके
साया
वो
अब
कहीं
लापता
है
है
यक़ीं
अब
भी
मुझपे
उसे
पर
शख़्स
वो
यार
पागल
बड़ा
है
लौटा
है
जब
से
वो
उस
गली
से
जान
देने
पे
'अंकुर'
अड़ा
है
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Ankur Mishra
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ख़त्म
ये
फ़ासले
कर
दो
अब
होंठों
पर
होंठ
ये
धर
दो
अब
जाने
कब
मिलना
हो
क्या
पता
शा
में
यादों
से
ये
भर
दो
अब
मुद्दतों
बाद
तो
आए
हो
नाम
रातें
मेरे
कर
दो
अब
कब
से
बैठा
हूँ
राहों
में
मैं
सपनों
का
ही
कोई
घर
दो
अब
यादें
ये
जो
सताती
हैं
अब
यादों
से
इन
रिहा
कर
दो
अब
चाहे
ले
लो
ये
तुम
जान
भी
पहले
ख़ुद
से
जुदा
कर
दो
अब
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Ankur Mishra
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इस
तरह
भी
याद
आया
कर
इस
तरह
भी
चल
निभाया
कर
कर
नहीं
सकता
वफ़ा
तो
फिर
क़स
में
चल
झूठी
ही
खाया
कर
छोड़
दूँगा
रस्ता
तेरा
मैं
मुझको
यूँँ
मत
आज़माया
कर
भूल
जाऊँगा
मैं
ख़ुद
को
ही
पास
इतना
मत
तू
आया
कर
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Ankur Mishra
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एक
दिन
यूँँ
हीं
गुज़र
जाएँगे
छोड़
के
यादों
को
मर
जाएँगे
Ankur Mishra
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