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Ankur Mishra
aankh men jo thehra paani hai
aankh men jo thehra paani hai | आँख में जो ठहरा पानी है
- Ankur Mishra
आँख
में
जो
ठहरा
पानी
है
बस
यही
अब
इक
निशानी
है
जंग
मैं
हारा
नहीं
लेकिन
दूर
मुझ
सेे
मेरी
रानी
है
जाम
शायद
आख़िरी
है
ये
आख़िरी
ही
ज़िंदगानी
है
दिल
अभी
तो
टूटा
है
जानाँ
क्यूँ
अभी
मय्यत
उठानी
है
चंद
लम्हें
हैं
अभी
बाक़ी
साँसों
में
थोड़ी
जवानी
है
फ़ासला
इतना
नहीं
अच्छा
एक
सी
अपनी
कहानी
है
- Ankur Mishra
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लग
गई
है
मुझे
तेरी
आदत
बुरी
अब
तो
पीछा
मिरा
छोड़
ऐ
ज़िंदगी
मौत
देगी
दुआएँ
लगाकर
गले
खोल
लेने
दे
मुझको
ये
ख़त
आख़िरी
ग़ैर
माना
हूँ
तेरे
लिए
मैं
मगर
इस
तरह
तो
न
कर
ऐ
सितम
ज़िंदगी
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Ankur Mishra
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किसलिए
इतनी
उदासी
है
ख़ुश
हूँ
हँसना
ही
तो
बाक़ी
है
कौन
करता
है
वफ़ा
किस
सेे
किसलिए
ये
याद
आती
है
जिस्म
से
है
राब्ता
सबका
रूह
ये
प्यासी
की
प्यासी
है
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Ankur Mishra
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अब
मोहब्बत
में
आज़माने
को
पास
कुछ
भी
नहीं
गँवाने
को
जिस्म
पे
यादों
के
निशाँ
हैं
बस
और
कुछ
भी
नहीं
छुपाने
को
लौट
आया
हूँ
हार
के
वापस
जीत
की
राह
मैं
दिखाने
को
हो
न
जाए
कहीं
कोई
रौशन
शम्अ
यादें
तिरी
मिटाने
को
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Ankur Mishra
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चुपके
चुपके
यूँँ
नज़ारा
करते
हैं
आँखों
से
उसको
पुकारा
करते
हैं
वो
समझता
ही
नहीं
तो
क्या
करें
रात
भर
हम
तो
इशारा
करते
हैं
उसके
हाथों
में
था
लिखना
मेरा
अब
जिसको
यारों
हम
सँवारा
करते
हैं
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Ankur Mishra
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पहले
से
भी
गहरा
हुआ
वो
दरिया
जो
सहरा
हुआ
जाने
कहाँ
तक
जाएगा
ये
रास्ता
ठहरा
हुआ
कुछ
भी
नहीं
है
पास
फिर
क्यूँ
मुझ
पे
ये
पहरा
हुआ
सुन
ख़ामुशी
लफ़्ज़ों
की
इन
दुश्मन
मिरा
बहरा
हुआ
कब
जाने
आएगा
वो
फिर
है
मुझ
में
जो
ठहरा
हुआ
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Ankur Mishra
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