havas ko hai nashaat-e-kaar kya kyana ho marna to jeene ka mazaa kya | हवस को है नशात-ए-कार क्या क्या

  - Mirza Ghalib
हवसकोहैनशात-ए-कारक्याक्या
होमरनातोजीनेकामज़ाक्या
तजाहुल-पेशगीसेमुद्दआक्या
कहाँतकसरापानाज़क्याक्या
नवाज़िश-हा-ए-बेजादेखताहूँ
शिकायत-हा-ए-रंगींकागिलाक्या
निगाह-ए-बे-महाबाचाहताहूँ
तग़ाफ़ुल-हा-ए-तमकीं-आज़माक्या
फ़रोग़-ए-शोला-ए-ख़सयक-नफ़सहै
हवसकोपास-ए-नामूस-ए-वफ़ाक्या
नफ़समौज-ए-मुहीत-ए-बे-ख़ुदीहै
तग़ाफ़ुल-हा-ए-साक़ीकागिलाक्या
दिमाग़-ए-इत्र-ए-पैराहननहींहै
ग़म-ए-आवारगी-हा-ए-सबाक्या
दिल-ए-हर-क़तराहैसाज़-ए-अनल-बहर
हमउसकेहैंहमारापूछनाक्या
मुहाबाक्याहैमैंज़ामिनइधरदेख
शहीदान-ए-निगहकाख़ूँ-बहाक्या
सुनग़ारत-गर-ए-जिंस-ए-वफ़ासुन
शिकस्त-ए-शीशा-ए-दिलकीसदाक्या
कियाकिसनेजिगर-दारीकादावा
शकीब-ए-ख़ातिर-ए-आशिक़भलाक्या
येक़ातिलवादा-ए-सब्र-आज़माक्यूँँ
येकाफ़िरफ़ित्ना-ए-ताक़त-रुबाक्या
बला-ए-जाँहै'ग़ालिब'उसकीहरबात
इबारतक्याइशारतक्याअदाक्या
  - Mirza Ghalib
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