gilaa hai shauq ko dil men bhi tangi-e-jaa ka | गिला है शौक़ को दिल में भी तंगी-ए-जा का

  - Mirza Ghalib
गिलाहैशौक़कोदिलमेंभीतंगी-ए-जाका
गुहरमेंमहवहुआइज़्तिराबदरियाका
येजानताहूँकितूऔरपासुख़-ए-मकतूब
मगरसितम-ज़दाहूँज़ौक़-ए-ख़ामा-फ़रसाका
हिना-ए-पा-ए-ख़िज़ाँहैबहारअगरहैयही
दवाम-ए-कुल्फ़त-ए-ख़ातिरहैऐशदुनियाका
ग़म-ए-फ़िराक़मेंतकलीफ़-ए-सैर-ए-बाग़दो
मुझेदिमाग़नहींख़ंदा-हा-ए-बेजाका
हनूज़महरमी-ए-हुस्नकोतरसताहूँ
करेहैहर-बुन-ए-मूकामचश्म-ए-बीनाका
दिलउसकोपहलेहीनाज़-ओ-अदासदेबैठे
हमेंदिमाग़कहाँहुस्नकेतक़ाज़ाका
कहकिगिर्याब-मिक़दार-ए-हसरत-ए-दिलहै
मिरीनिगाहमेंहैजम-ओ-ख़र्चदरियाका
फ़लककोदेखकेकरताहूँउसकोयाद'असद'
जफ़ामेंउसकीहैअंदाज़कार-फ़रमाका
मिराशुमूलहरइकदिलकेपेच-ओ-ताबमेंहै
मैंमुद्दआहूँतपिश-नामा-ए-तमन्नाका
मिलीवुसअ'त-ए-जौलानयकजुनूँहमको
अदमकोलेगएदिलमेंग़ुबारसहराका
  - Mirza Ghalib
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