arz-e-niyaaz-e-ishq ke qaabil nahin raha | अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़ के क़ाबिल नहीं रहा

  - Mirza Ghalib
अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़केक़ाबिलनहींरहा
जिसदिलपेनाज़थामुझेवोदिलनहींरहा
जाताहूँदाग़-ए-हसरत-ए-हस्तीलिएहुए
हूँशम-ए-कुश्तादर-ख़ुर-ए-महफ़िलनहींरहा
मरनेकीदिलऔरहीतदबीरकरकिमैं
शायान-ए-दस्त-ओ-बाज़ु-ए-क़ातिलनहींरहा
बर-रू-ए-शश-जहतदर-ए-आईनाबाज़है
याँइम्तियाज़-ए-नाक़िस-ओ-कामिलनहींरहा
वाकरदिएहैंशौक़नेबंद-ए-नक़ाब-ए-हुस्न
ग़ैर-अज़-निगाहअबकोईहाइलनहींरहा
गोमैंरहारहीन-ए-सितम-हा-ए-रोज़गार
लेकिनतिरेख़यालसेग़ाफ़िलनहींरहा
दिलसेहवा-ए-किश्त-ए-वफ़ामिटगईकिवाँ
हासिलसिवाएहसरत-ए-हासिलनहींरहा
बेदाद-ए-इश्क़सेनहींडरतामगर'असद'
जिसदिलपेनाज़थामुझेवोदिलनहींरहा
हर-चंदमैंहूँतूती-ए-शीरीं-सुख़नवले
आईनाआहमेरेमुक़ाबिलनहींरहा
जाँ-दाद-गाँकाहौसलाफ़ुर्सत-गुदाज़है
याँअर्सा-ए-तपीदन-ए-बिस्मिलनहींरहा
हूँक़तरा-ज़नब-वादी-ए-हसरतशबानारोज़
जुज़तार-ए-अश्कजादा-ए-मंज़िलनहींरहा
आहमेरीख़ातिर-ए-वाबस्ताकेसिवा
दुनियामेंकोईउक़्दा-ए-मुश्किलनहींरहा
अंदाज़-ए-नालायादहैंसबमुझकोपर'असद'
जिसदिलपेनाज़थामुझेवोदिलनहींरहा
  - Mirza Ghalib
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