nagri nagri fira musaafir ghar ka rastaa bhool gaya | नगरी नगरी फिरा मुसाफ़िर घर का रस्ता भूल गया

  - Meeraji
नगरीनगरीफिरामुसाफ़िरघरकारस्ताभूलगया
क्याहैतेराक्याहैमेराअपनापरायाभूलगया
क्याभूलाकैसेभूलाक्यूँँपूछतेहोबसयूँँसमझो
कारनदोशनहींहैकोईभूलाभालाभूलगया
कैसेदिनथेकैसीरातेंकैसीबातेंघातेंथीं
मनबालकहैपहलेप्यारकासुंदरसपनाभूलगया
अँधियारेसेएककिरननेझाँककेदेखाशरमाई
धुँदलीछबतोयादरहीकैसाथाचेहराभूलगया
यादकेफेरमेंकरदिलपरऐसीकारीचोटलगी
दुखमेंसुखहैसुखमेंदुखहैभेदयेन्याराभूलगया
एकनज़रकीएकहीपलकीबातहैडोरीसाँसोंकी
एकनज़रकानूरमिटाजबइकपलबीताभूलगया
सूझ-बूझकीबातनहींहैमन-मौजीहैमस्ताना
लहरलहरसजासरपटकासागरगहराभूलगया
  - Meeraji
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy