band-e-qaba ko khooban jis vaqt vaa karenge | बंद-ए-क़बा को ख़ूबाँ जिस वक़्त वा करेंगे

  - Meer Taqi Meer
बंद-ए-क़बाकोख़ूबाँजिसवक़्तवाकरेंगे
ख़म्याज़ा-कशजोहोंगेमिलनेकेक्याकरेंगे
रोनायहीहैमुझकोतेरीजफ़ासेहर-दम
येदिल-दिमाग़दोनोंकबतकवफ़ाकरेंगे
हैदीनसरकादेनागर्दनपेअपनीख़ूबाँ
जीतेहैंतोतुम्हारायेक़र्ज़अदाकरेंगे
दरवेशहैंहमआख़िरदो-इकनिगहकीरुख़्सत
गोशेमेंबैठेप्यारेतुमकोदु'आकरेंगे
आख़िरतोरोज़ेआएदो-चाररोज़हमभी
तरसाबचोंमेंजाकरदारूपियाकरेंगे
कुछतोकहेगाहमकोख़ामोशदेखकरवो
इसबातकेलिएअबचुपहीरहाकरेंगे
आलममिरेहैतुझपरआईअगरक़यामत
तेरीगलीकेहर-सूमहशरहुआकरेंगे
दामान-ए-दश्तसूखाअब्रोंकीबे-तहीसे
जंगलमेंरोनेकोअबहमभीचलाकरेंगे
लाईतिरीगलीतकआवारगीहमारी
ज़िल्लतकीअपनीअबहमइज़्ज़तकियाकरेंगे
अहवाल-'मीर'क्यूँँकरआख़िरहोएकशबमें
इकउम्रहमयेक़िस्सातुमसेकहाकरेंगे
  - Meer Taqi Meer
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