log may peene ko din raat machalte kyun hain | लोग मय पीने को दिन रात मचलते क्यूँँ हैं

  - Meena Bhatt
लोगमयपीनेकोदिनरातमचलतेक्यूँँहैं
औरपीतेहैंतोफिरपीकेफिसलतेक्यूँँहैं
उनकीमर्ज़ीकेबिनाहिलतानहींजबकोई
फिरभीहरबातपेजानेवोउबलतेक्यूँँहैं
खौ़फ़होताहैजिन्हेंयाररपटजानेका
तोवहीलोगयूँँबारिशमेंनिकलतेक्यूँँहैं
आगमौजूदहैनफ़रतकीजहाँमेंफिरभी
नामे-मज़हबपेसभीजह्रउगलतेक्यूँँहैं
ख़ुदमददकुछभीनहींकरतेग़रीबोंकीवो
जोरसदमिलतीहैउसकोभीनिगलतेक्यूँँहैं
बारहाकरतेहैंइनकारमुहब्बतसेमगर
ज़िक्रहोताहैजबउनकातोउछलतेक्यूँँहैं
जबउन्हेंप्यारनहींहमसेेरहाहैमीना
सामनेघरकेबतामेरेटहलतेक्यूँँहैं
  - Meena Bhatt
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