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Meem Maroof Ashraf
vo zan-e-khaas khaas hai kab tak
vo zan-e-khaas khaas hai kab tak | वो ज़न-ए-ख़ास, ख़ास है कब तक
- Meem Maroof Ashraf
वो
ज़न-ए-ख़ास,
ख़ास
है
कब
तक
जब
तलक
जाँ
में
जान
है
तब
तक
कह
ही
देता
हूँ
इश्क़
है
तुम
से
बात
आ
ही
गई
है
जब
लब
तक
कौन
होता
है
आज
कल
किस
का
गरचे
हो
भी
तो
अपने
मतलब
तक
कुछ
तो
अपना
भी
हम
ख़याल
करें
सोचते
ही
रहें
तुम्हें
कब
तक
रास
आ
जाए
जिस
को
मैख़ाना
कैसे
पहुँचे
वो
शैख़-साहब
तक
एक
औरत
को
चाहते
"अशरफ़"
हो
गए
दस
बरस
हमें
अब
तक
- Meem Maroof Ashraf
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अगरचे
इश्क़
में
मजनू
बड़े
बदनाम
होते
हैं
अगरचे
क़ैस
जैसे
आशिक़ों
के
नाम
होते
हैं
भटक
सकती
नहीं
जंगल
में
लैला
चाह
करके
भी
अजी
लैला
को
घर
में
दूसरे
भी
काम
होते
हैं
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Gagan Bajad 'Aafat'
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इलाज
अपना
कराते
फिर
रहे
हो
जाने
किस
किस
से
मोहब्बत
कर
के
देखो
ना
मोहब्बत
क्यूँँ
नहीं
करते
Farhat Ehsaas
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वहशत-ए-दिल
के
ख़रीदार
भी
नापैद
हुए
कौन
अब
इश्क़
के
बाज़ार
में
खोलेगा
दुकाँ
Ibn E Insha
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इश्क़
हमारा
चाँद
सितारे
छू
लेगा
घुटनों
पर
आकर
इज़हार
किया
हमने
Darpan
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इश्क़
के
इज़हार
में
हर-चंद
रुस्वाई
तो
है
पर
करूँँ
क्या
अब
तबीअत
आप
पर
आई
तो
है
Akbar Allahabadi
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हुआ
जो
इश्क़
तो
वो
रोज़
ओ
शब
को
भूल
गए
वो
अपने
इश्क़
ए
नुमाइश
में
सब
को
भूल
गए
कहाँ
वो
दुनिया
में
आए
थे
बंदगी
के
लिए
मिला
सुकून
जहाँ
में
तो
रब
को
भूल
गए
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Hameed Sarwar Bahraichi
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अगर
तू
मुझ
सेे
शर्माती
रहेगी
मुहब्बत
हाथ
से
जाती
रहेगी
Tehzeeb Hafi
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मैं
तेरे
साथ
सितारों
से
गुज़र
सकता
हूँ
कितना
आसान
मोहब्बत
का
सफ़र
लगता
है
Bashir Badr
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तुम
मेरी
पहली
मोहब्बत
तो
नहीं
हो
लेकिन
मैंने
चाहा
है
तुम्हें
पहली
मोहब्बत
की
तरह
Wasi Shah
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यूँँ
कहें
नुमाइशों
के
दिन
क़रीब
आ
गए
महज़
फ़रवरी
हो
किस
तरह
महीना
इश्क़
का
Neeraj Neer
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साम'ईं
वाह
वाह
करते
रहे
रो
पड़ा
में
ग़ज़ल
सुनाते
हुए
Meem Maroof Ashraf
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देख
अब
और
अच्छी
लगती
है
यार
चश्मा
नहीं
लगाना
था
Meem Maroof Ashraf
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आपने
तोड़
करके
दिल
मेरा
मेरे
दिल
में
जगह
बना
ली
है
Meem Maroof Ashraf
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क्यूँ
मिरे
वास्ते
परेशाँ
हो
तुम
तो
कहते
थे
बे-वफ़ा
था
मैं
Meem Maroof Ashraf
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लौट
कर
आ
गया
दिसंबर
भी
वो
मगर
लौट
कर
नहीं
आया
Meem Maroof Ashraf
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