vo zan-e-khaas khaas hai kab tak | वो ज़न-ए-ख़ास, ख़ास है कब तक

  - Meem Maroof Ashraf
वोज़न-ए-ख़ास,ख़ासहैकबतक
जबतलकजाँमेंजानहैतबतक
कहहीदेताहूँइश्क़हैतुमसे
बातहीगईहैजबलबतक
कौनहोताहैआजकलकिसका
गरचेहोभीतोअपनेमतलबतक
कुछतोअपनाभीहमख़यालकरें
सोचतेहीरहेंतुम्हेंकबतक
रासजाएजिसकोमैख़ाना
कैसेपहुँचेवोशैख़-साहबतक
एकऔरतकोचाहते"अशरफ़"
होगएदसबरसहमेंअबतक
  - Meem Maroof Ashraf
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