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Meem Maroof Ashraf
gham men dil mubtala nahin hota
gham men dil mubtala nahin hota | ग़म में दिल मुब्तला नहीं होता
- Meem Maroof Ashraf
ग़म
में
दिल
मुब्तला
नहीं
होता
अब
तिरा
तज़्किरा
नहीं
होता
कुछ
न
कुछ
वास्ता
तो
रहता
है
जिस
से
कुछ
वास्ता
नहीं
होता
तुम
नहीं
जानते
मोहब्बत
में
फ़ासला,
फ़ासला
नहीं
होता
किस
तरह
दोस्तों
को
समझाऊँ
उस
से
अब
राब्ता
नहीं
होता
सब
को
हैरत
है
मेरी
हालत
पर
मैं
कि
हैरत-ज़दा
नहीं
होता
कैसे
कह
दूँ
उसे
मोहब्बत
है
वो
तो
मुझ
से
ख़फ़ा
नहीं
होता
ज़ख़्म-ए-उल्फ़त
वो
ज़ख़्म
है
जिस
में
कोई
मरहम
दवा
नहीं
होता
लाख
करता
हूँ
कोशिशें
"अशरफ़"
तर्क-ए-अहद-ए-वफ़ा
नहीं
होता
- Meem Maroof Ashraf
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कैसे
समझोगे
तुम
हमारा
दुख
है
हमारा,
नहीं
तुम्हारा
दुख
जितना
चाहो
अता
किए
जाओ
आज
कल
है
हमें
गवारा
दुख
एक
दो
दुख
अगर
हो
कैसा
दुख
हम
को
हैं
एक
सौ
अठारह
दुख
अब
के
आना
तो
फिर
नहीं
जाना
और
देना
न
अब
ख़ुदारा
दुख
शादमाँ-दिल
ये
ख़ाक
समझेंगे
किस
क़दर
होता
है
ये
प्यारा
दुख
कोई
तो
दुख
का
हो
मिरे
साथी
तन्हा
फिरता
है
मारा
मारा
दुख
देख
कर
मुझ
को
लोग
कहते
हैं
है
मुझे
आज
भी
तुम्हारा
दुख
कुछ
ख़ुदा
उस
को
भी
दिया
होता
क्या
कि
हम
पर
ही
सब
उतारा
दुख
दुख
से
'अशरफ़'
दुखी
हो
के
हम
ने
ज़ोर
से
आख़िरश
पुकारा
दुख
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Meem Maroof Ashraf
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कुल
इब्न-ए-आदम
उन
पे
क़ुर्बान
हो
न
जाएँ
तौबा
वो
उन
के
जलवे
अल्लाह
वो
नज़ारे
Meem Maroof Ashraf
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लफ़्ज़
सब
ग़ैर-मुस्तनद
हैं
तिरे
तेरी
आँखों
में
प्यार
दिखता
है
Meem Maroof Ashraf
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नहीं
करेंगे
तुझे
याद
एक
मुद्दत
तक
करेंगे
याद
तो
फिर
याद
करते
जाएँगे
Meem Maroof Ashraf
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मिस्ल-ए-का'बा
था
तुझ
को
क्या
मालूम
वो
मकाँ
तू
ने
जो
गिरा
डाला
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