gham men dil mubtala nahin hota | ग़म में दिल मुब्तला नहीं होता

  - Meem Maroof Ashraf
ग़ममेंदिलमुब्तलानहींहोता
अबतिरातज़्किरानहींहोता
कुछकुछवास्तातोरहताहै
जिससेकुछवास्तानहींहोता
तुमनहींजानतेमोहब्बतमें
फ़ासला,फ़ासलानहींहोता
किसतरहदोस्तोंकोसमझाऊँ
उससेअबराब्तानहींहोता
सबकोहैरतहैमेरीहालतपर
मैंकिहैरत-ज़दानहींहोता
कैसेकहदूँउसेमोहब्बतहै
वोतोमुझसेख़फ़ानहींहोता
ज़ख़्म-ए-उल्फ़तवोज़ख़्महैजिसमें
कोईमरहमदवानहींहोता
लाखकरताहूँकोशिशें"अशरफ़"
तर्क-ए-अहद-ए-वफ़ानहींहोता
  - Meem Maroof Ashraf
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