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Manohar Shimpi
usii ik khilish men ana main hui hooñ
usii ik khilish men ana main hui hooñ | उसी इक ख़लिश में अना मैं हुई हूँ
- Manohar Shimpi
उसी
इक
ख़लिश
में
अना
मैं
हुई
हूँ
अभी
दिल
लगा
अब
फ़ना
मैं
हुई
हूँ
- Manohar Shimpi
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उधारी
सर
से
ऊपर
बढ़
चुकी
है
हमारी
जान
जोखिम
में
पड़ी
है
हमीं
अपमान
सहकर
जी
रहे
हैं
अना
की
लाश
पंखे
पर
मिली
है
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Vikas Sahaj
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हाँ
ठीक
है
मैं
अपनी
अना
का
मरीज़
हूँ
आख़िर
मिरे
मिज़ाज
में
क्यूँँ
दख़्ल
दे
कोई
Jaun Elia
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ख़ुद
को
मनवाने
का
मुझको
भी
हुनर
आता
है
मैं
वो
कतरा
हूँ
समुंदर
मेरे
घर
आता
है
Waseem Barelvi
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उसके
वालिद
नवाब
हैं
भाई
उसको
हक़
है
हमें
भुलाने
का
Deepak Sharma Deep
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हुनर
से
काम
लिया
पेंट
ब्रश
नहीं
तोड़ा
बना
लिया
तेरे
जैसा
ही
कोई
रंगों
से
मुझे
ये
डर
है
कि
मिल
जाएगी
तो
रो
दूँगा
मैं
जिस
ख़ुशी
को
तरसता
रहा
हूँ
बरसों
से
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Rahul Gurjar
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अगर
पलक
पे
है
मोती
तो
ये
नहीं
काफ़ी
हुनर
भी
चाहिए
अल्फ़ाज़
में
पिरोने
का
Javed Akhtar
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मोहब्बत
नेक-ओ-बद
को
सोचने
दे
ग़ैर-मुमकिन
है
बढ़ी
जब
बे-ख़ुदी
फिर
कौन
डरता
है
गुनाहों
से
Arzoo Lakhnavi
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निगल
ही
चुका
था
जफ़ा
का
निवाला
अना
फिर
तमाशा
नया
कर
रही
है
Amaan Pathan
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पा
ए
उम्मीद
प
रक्खे
हुए
सर
हैं
हम
लोग
हैं
न
होने
के
बराबर
ही
मगर
हैं
हम
लोग
तू
ने
बरता
ही
नहीं
ठीक
से
हम
को
ऐ
दोस्त
ऐब
लगते
हैं
ब-ज़ाहिर
प
हुनर
हैं
हम
लोग
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Abhishek shukla
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बस
यही
इक
हुनर
सीखना
है
मुझे
वो
मिरी
चुप्पी
कैसे
पढ़ा
करती
है
Harsh saxena
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भलाई
बुराई
वफ़ा
और
ही
है
भले
सोच
से
ही
सफ़ा
और
ही
है
मुसाफ़िर
हूँ
मैं
भी
मेरा
घर
जहाँ
है
सफ़र
में
दिखी
वो
जफ़ा
और
ही
है
करे
ज़ुल्म
कोई
कहीं
भी
कभी
भी
बचेंगे
वो
कितनी
दफ़ा
और
ही
है
अदाएँ
दुआएँ
असर
कर
रही
हैं
इबादत
इनायत
वफ़ा
और
ही
है
तड़पते
धड़कते
ये
दिल
हैं
मनोहर
यहाँ
इश्क़
में
फिर
सफ़ा
और
ही
है
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Manohar Shimpi
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चाहना
दिल
से
ज़िंदगी
होती
ख़ूब-सूरत
वो
आशिक़ी
होती
बे-मुरव्वत
जिधर
कहीं
भी
हो
सिर्फ़
उन
सेे
ही
बे-रुख़ी
होती
बहर
दिल
से
लबों
पे
जब
आती
लुत्फ़
में
फिर
कहाँ
कमी
होती
जंग
लड़ना
कहाँ
रहे
आसाँ
फ़त्ह
करना
शनावरी
होती
जब
किसी
की
कमी
बहुत
होती
फिर
तभी
आँख
में
नमी
होती
इश्क़
में
जो
नसीब
से
मिलता
वो
ख़ुदा
की
गदागरी
होती
ख़्वाहिशें
और
भी
'मनोहर'
है
मिल
जो
जाए
वो
ज़िंदगी
होती
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Manohar Shimpi
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रियासत
भी
ग़रीबों
को
दुहाई
क्यूँँ
नहीं
देती
अमीरों
आह
उनकी
फिर
सुनाई
क्यूँँ
नहीं
देती
Manohar Shimpi
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साथ
में
माँ
सदा
हुआ
करती
हर्फ़-दर-हर्फ़
वो
दु'आ
करती
ख़ूब
सबका
ख़याल
भी
रखती
ख़िज़्र
जैसी
वही
हुआ
करती
सिर्फ़
गिर्या
अगर
कहीं
सुनती
हाथ
दिल
से
वही
छुआ
करती
क्या
किसी
के
लिए
नहीं
करती
शख़्सियत
और
ही
हुआ
करती
राह
माँ
से
रहे
जुदा
कोई
वो
मुसीबत
भरी
हुआ
करती
वो
फ़तूही
बुना
कभी
करती
फिर
ख़ुशी
से
उसे
छुआ
करती
एक
किरदार
में
न
माँ
जीती
सच
में
रहमत
वही
हुआ
करती
मसअला
जब
कभी
रहे
दिल
का
सिर्फ़
दिल
से
वही
दु'आ
करती
हाथ
सर
हो
अगर
कभी
माँ
का
फिर
न
कोई
कमी
हुआ
करती
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Manohar Shimpi
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चाँद
सूरज
जब
तलक
रौशन
दिखेगा
इश्क़
का
भी
ख़ूब
फिर
सम्मान
होगा
Manohar Shimpi
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