तुम वादियों को जन्नत-ए-कश्मीर ही कहते रहे

  - Manohar Shimpi
तुमवादियोंकोजन्नत-ए-कश्मीरहीकहतेरहे
उसख़ुशनुमामाहौलमेंलोगोंकेघरबसतेरहे
जोवाएदेहमनेकिएथेवोनिभातेहीगए
फिरख़ूनपानीसाथमेंहीकबतलकबहतेरहे
ज़ंजीरपैरोंमेंतुम्हींआतंकियोंकेबांधना
वर्नायूँँहीहालातकेहीसाथमेंरहतेरहे
शौक़-ए-शहादतकौनसाभीमुल्कथोड़ेचाहता
कुंबेइधरकेयाउधरकेदर्दक्यूँँसहतेरहे
इकफ़ैसलानक़्शाबदलदेगासमझलेनासभी
उसकेलिएआज़ादहमहैंतुमभीहोकहतेरहे
  - Manohar Shimpi
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