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Manohar Shimpi
kya tilism-e-majaaz hai yaaron
kya tilism-e-majaaz hai yaaron | क्या तिलिस्म-ए-मजाज़ है यारों
- Manohar Shimpi
क्या
तिलिस्म-ए-मजाज़
है
यारों
कोई
तो
दिल-नवाज़
है
यारों
ख़ून
का
रंग
एक
ही
है
जब
कैसे
फिर
इम्तियाज़
है
यारों
ढूॅंढ़ते
हम
रहे
जिसे
थे
वो
हम
सेफ़र
जाँ-नवाज़
है
यारों
कौन
छोटा
बड़ा
ख़ुदा
जाने
एक
उसका
नियाज़
है
यारों
माँ
तेरे
ही
बग़ैर
क्या
जीना
कौन
फिर
अब
नवाज़
है
यारों
- Manohar Shimpi
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मुद्दतों
ब'अद
मुयस्सर
हुआ
माँ
का
आँचल
मुद्दतों
ब'अद
हमें
नींद
सुहानी
आई
Iqbal Ashhar
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अज़ीज़-तर
मुझे
रखता
है
वो
रग-ए-जाँ
से
ये
बात
सच
है
मेरा
बाप
कम
नहीं
माँ
से
Tahir Shaheer
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इक
लड़की
है
जो
इकदम
घर
जैसी
है
वो
बिल्कुल
माँ
जैसी
बातें
करती
है
Siddharth Saaz
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तुम
जितना
तो
कोई
मुझको
ख़ास
नहीं
लेकिन
फिर
भी
क्यूँ
तुमको
विश्वास
नहीं
मुझ
सेे
बेहतर
लड़का
तो
मिल
जाएगा
लेकिन
मेरी
माँ
से
बेहतर
सास
नहीं
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Tanoj Dadhich
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वो
उजला
हो
कि
मैला
हो
या
महँगा
हो
कि
सस्ता
हो
ये
माँ
का
सर
है
इस
पर
हर
दुपट्टा
मुस्कुराता
है
Siraj Faisal Khan
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ये
मख़मली
गद्दे
तो
तुझको
ही
मुबारक
हों
ऐ
दोस्त
मुझे
बस
माँ
की
गोद
ही
काफ़ी
है
Harsh saxena
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सब
ने
माना
मरने
वाला
दहशत-गर्द
और
क़ातिल
था
माँ
ने
फिर
भी
क़ब्र
पे
उस
की
राज-दुलारा
लिक्खा
था
Ahmad Salman
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पहले
अपनी
माँ
को
याद
किया
हमने
फिर
ज़ोमैटो
से
खाना
मंगवाया
है
-
तनोज
दाधीच
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Tanoj Dadhich
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मैं
तेरी
गोद
में
कैसा
लगा
था
माँ
तेरा
तो
दूसरा
बचपन
हुआ
था
मैं
Rohit tewatia 'Ishq'
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नज़रें
हो
गड़ीं
जिनकी
वसीयत
पे
दिनो-रात
माँ-बाप
कि
'उम्रों
कि
दु'आ
खाक़
करेंगे
Asad Akbarabadi
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वहशत-ए-दिल
किसे
बताऊँगा
कौन
क़ाबिल
किसे
बताऊँगा
रोज़
तूफ़ान
ही
वहाँ
आता
फिर
वो
साहिल
किसे
बताऊँगा
ख़ौफ़
से
वो
फ़रेब
करता
है
चोर
जाहिल
किसे
बताऊँगा
इक
दिया
रात
भर
कहाँ
जलता
ऐ
मराहिल
किसे
बताऊँगा
साँप
यूँँ
ही
न
काटता
यारों
फिर
हलाहिल
किसे
बताऊँगा
एक
चेहरे
पे
थे
कई
चहरे
था
वो
क़ातिल
किसे
बताऊँगा
दूसरे
को
कहे
'मनोहर'
क्या
है
न
आहिल
किसे
बताऊँगा
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Manohar Shimpi
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हक़
के
लिए
चलता
सफ़र
में
कोई
है
ख़ुद
मोम
सा
जलता
नज़र
में
कोई
है
Manohar Shimpi
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दिलों
में
इत्तिफ़ाक़न
बेकसी
कैसे
किसी
भी
मुद्दआ
से
बे-रुख़ी
कैसे
Manohar Shimpi
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तेरा
कमाल
बहुत
ख़ास
हर-हुनर
से
भी
रखे
तुझे
वो
ही
महफ़ूज़
हफ़-नज़र
से
भी
Manohar Shimpi
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खेल
कोई
बनाम
रहता
है
हश्र
का
भी
मक़ाम
रहता
है
मय-कदे
में
कहाँ
सभी
मिलते
सिर्फ़
क़िस्सा
तमाम
रहता
है
बंदगी
भी
लगे
बड़ी
लेकिन
अब
दिल-ओ-दिल
में
राम
रहता
है
ऐ
मुहब्बत
नसीब
हो
तो
फिर
महज़
मिलना
ही
आम
रहता
है
कौन
सा
ताज
सर
पे
होता
है
उम्र
भर
सिर्फ़
नाम
रहता
है
इक
नज़र
से
अगर
नशा
होता
हाथ
क्यूँँ
कोई
जाम
रहता
है
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Manohar Shimpi
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