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Manohar Shimpi
k
k | कभी पास थे दूर जाने लगे
- Manohar Shimpi
कभी
पास
थे
दूर
जाने
लगे
वही
रहगुज़र
अब
बुलाने
लगे
कहाँ
मेरी
मंज़िल
मेरे
पास
थी
यहाँ
पर
पहुँचने
ज़माने
लगे
हिमाक़त
वो
करके
कहाँ
आ
गए
अभी
होश
उनके
ठिकाने
लगे
कभी
मुस्कुराए
अदाएँ
दिखाए
मिरे
हाथ
जैसे
ख़ज़ाने
लगे
उसी
ने
दिलों-दिल
बहाने
बनाए
कई
बार
सूने
फ़साने
लगे
मुझे
ख़ूब
चेहरे
पे
चेहरे
दिखे
वो
दुश्मन
"मनोहर"
पुराने
लगे
- Manohar Shimpi
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बज़्म
में
ला-जवाब
दिखना
था
और
फिर
माहताब
दिखना
था
हुस्न
से
अंजुमन
सजाना
था
हम-नफ़स
बे-हिसाब
दिखना
था
रोष
है
ही
इसीलिए
यारों
दफ़'अतन
ही
इताब
दिखना
था
हाँ
उभरते
हुए
कभी
घर
का
फिर
मुझे
आफ़ताब
दिखना
था
हुस्न
के
रंग
तो
बहुत
होते
फिर
किसी
का
शबाब
दिखना
था
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Manohar Shimpi
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हर्फ़-दर-हर्फ़
मुस्कुराओ
ना
बात
हँस
के
कभी
बताओ
ना
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याज़
कोई
भी
रहे
दीवानगी
भी
चाहिए
मसअले
हालात
वर्ना
आज
भी
प्रतिकूल
हैं
Manohar Shimpi
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दिल-ओ-दिल
से
सच
में
उसे
जानती
हूँ
वो
क़ाबिल
था
क़ाबिल
है
क़ाबिल
रहेगा
Manohar Shimpi
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सितारों
के
सिवा
भी
ये
निराली
ही
मुझे
लगती
चराग़ों
से
सजी
महफ़िल
दिवाली
ही
मुझे
लगती
Manohar Shimpi
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