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Manohar Shimpi
is manch pe aanaa kahaan aasaan tha
is manch pe aanaa kahaan aasaan tha | इस मंच पे आना कहाँ आसान था
- Manohar Shimpi
इस
मंच
पे
आना
कहाँ
आसान
था
हासिल
हुआ
इस-वक़्त
वो
अरमान
था
मिलना
यहाँ
सब
सेे
फ़क़त
सपना
न
था
मिलके
हुआ
पूरा
वही
सम्मान
था
पढ़ते
रहे
लिखते
रहे
हैं
हम
सभी
पढ़के
ग़ज़ल
लिखना
कहाँ
आसान
था
जलते
कभी
बुझते
दिए
वो
गाह
के
देखे
जिधर
से
एक
रौशनदान
था
शोहरत
कभी
ऐसे
हमें
मिलती
नहीं
दिल
से
उसे
पाना
वही
अरमान
था
राह-ए-सफ़र
में
वक़्त
क्यूँ
इतना
लगा
ये
सोच
के
मैं
भी
बहुत
हैरान
था
हाथों
लगा
मेरे
वही
अनमोल
था
कोई
सुख़न-वर
का
वही
दीवान
था
- Manohar Shimpi
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अब
न
मैं
वो
हूँ
न
बाकी
हैं
ज़माने
मेरे
फिर
भी
मशहूर
हैं
शहरों
में
फ़साने
मेरे
Rahat Indori
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उस
के
दिल
की
आग
ठंडी
पड़
गई
मुझ
को
शोहरत
मिल
गई
इल्ज़ाम
से
Siraj Faisal Khan
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दौलत
शोहरत
जैसी
छोटी
चीज़ों
का
ख़ुद्दारी
के
आगे
कोई
मोल
नहीं
Poonam Yadav
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मेरी
शोहरत
के
तक़ाज़े
ही
अलग
थे
ताबिश
गुमशुदा
रहते
हुए
नाम
कमाना
था
मुझे
Tousief Tabish
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कभी
पहले
नहीं
था
जिस
क़दर
मजबूर
हूँ
मैं
आज
नज़र
आऊँ
न
ख़ुद
क्या
तुम
सेे
इतना
दूर
हूँ
मैं
आज
तुम्हारे
ज़ख़्म
को
ख़ाली
नहीं
जाने
दिया
मैंने
तुम्हारी
याद
में
ही
चीख़
के
मशहूर
हूँ
मैं
आज
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SHIV SAFAR
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पहुँचते
ही
नहीं
हैं
शे'र
उन
तक
हमें
मशहूर
होना
पड़
रहा
है
Tanoj Dadhich
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क्या
पूछते
हो
कौन
है
ये
किस
की
है
शोहरत
क्या
तुम
ने
कभी
'दाग़'
का
दीवां
नहीं
देखा
Dagh Dehlvi
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ज़माने
से
मिली
शोहरत
ज़माने
तक
ही
सीमित
है
हम
अपना
कद
हमारे
दोस्त
से
ऊँचा
नहीं
रखते
Asad Akbarabadi
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मशहूर
भी
हैं
बदनाम
भी
हैं
ख़ुशियों
के
नए
पैग़ाम
भी
हैं
कुछ
ग़म
के
बड़े
इनाम
भी
हैं
पढ़िए
तो
कहानी
काम
की
है
Anjum Barabankvi
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मोहब्बत
को
छुपाए
लाख
कोई
छुप
नहीं
सकती
ये
वो
अफ़्साना
है
जो
बे-कहे
मशहूर
होता
है
Lala Madhav Ram Jauhar
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हुस्न
होता
क्यूँँ
पशेमाँ
ही
यहाँ
महज़
बिखरे
जब
तेरे
अंदाज़
हैं
Manohar Shimpi
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फ़ज़ा
की
गर्द
में
मुझ
को
फ़रोग़-ए-हुस्न
दिखता
है
बयारों
से
कभी
पूछो
वो
कितनी
ख़ूब-सूरत
है
Manohar Shimpi
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इश्क़
के
दरमियान
में
क्या
है
हो
जुदा
फिर
ज़बान
में
क्या
है
साथ
में
हम-सफ़र
न
हो
तो
फिर
कम-नज़र
पे
गुमान
में
क्या
है
फ़र्क़
जब
सच
ग़लत
लगे
है
तो
ऐसे
वैसे
अमान
में
क्या
है
कोई
वीरान
सा
रहे
अक्सर
फिर
दिलों
के
मकान
में
क्या
है
सिर्फ़
तहज़ीब
से
पता
चलता
फिर
रखा
ख़ानदान
में
क्या
है
जब
इरादे
बुलंद
हों
तो
फिर
छूने
को
आसमान
में
क्या
है
तीर
कोई
चले
नज़र
से
तो
फिर
"मनोहर"
कमान
में
क्या
है
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Manohar Shimpi
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कभी
कभी
सवालिया
निशान
तुम
किया
करो
सवाल
के
जवाब
से
समा
बदल
दिया
करो
Manohar Shimpi
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वस्ल
की
तेरे
बेक़रारी
है
ख़ूब
क़िस्मत
लिखी
हमारी
है
Manohar Shimpi
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