एक बख़ियागर कहे कैसा ज़माना आ गया

  - Manohar Shimpi
एकबख़ियागरकहेकैसाज़मानागया
कोईठगअहद-ए-रियामेंआशियानाखागया
रौशनीकोअब्रनेजैसेमिटायाउसतरह
बोलकरकलयुगकिसीकाकोईतोहक़खागया
देखकेउसहुस्नकोहैरानतोमैंभीहुआ
राहचलनेवालेकोभीख़ूबलगताभागया
दालरोटीखानेवालेनेकहाँलूटाउन्हें
इकअकेलावोकईघर-बारकैसेखागया
फ़र्क़ऐसेलड़कियोंमेंऔरलड़कोंमेंहुआ
मानलेहरबात'आशिक़क्याज़मानागया
उसमहलपरइत्तिफ़ाक़नहीसियासतहोगई
आइना-ख़ानाबड़ाउसशहरकाफिरछागया
जबतरक़्क़ीकीहुईंबातेंमनोहरदिलसेही
सोचकरकुछगाँवसेमैंशहरकोहीगया
  - Manohar Shimpi
Share

profile-whatsappprofile-twitterprofile-fbprofile-copy